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सोमवार, 17 जुलाई, 2006 को 11:05 GMT तक के समाचार
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धमाकों से पर्यटन का धंधा हुआ मंदा

डल झील
अधिकांश होटलों में बुकिंग रद्द कर दी गई है
मोहम्मद शफ़ी श्रीनगर के डल झील में शिकारा चलाते हैं. लेकिन धंधा मंदा है. पिछले 11 जुलाई के सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद अधिकांश पर्यटक घाटी छोड़ चुके हैं.

मोहम्मद शफ़ी का कहना है, "जब से यहाँ पर धमाका हुआ है हमें बहुत परेशानी उठानी पड़ी है. चार दिन से बोहनी भी नहीं हुई है. सुबह ख़ाली हाथ आते हैं उसी तरह शाम को ख़ाली हाथ लौट जाते हैं. हमारे परिवार में आठ सदस्य है."

डल झील में सभी हाउसबोट ख़ाली हैं जबकि झील के किनारे स्थित सभी होटल भी ख़ाली पड़े हैं. होटल ज़मरूद के मैनेजर इमरान का कहना है कि इस वर्ष पर्यटन उद्योग फल-फूल रहा था लेकिन अचानक धमाके हुए और सब कुछ बिगड़ गया.

इमरान का कहना है कि 11 जुलाई की घटना के बाद जो पर्यटक उनके होटल में ठहरे थे वो दूसरे ही दिन चले गए.

 सैलानी बहुत डरे हुए थे. उनके बच्चे सहमे हुए थे. इसलिए उन्होंने यहाँ से जाना ही उचित समझा
इमरान, होटल मालिक

हालाँकि उन्हें अभी और तीन दिन रुकना था. इमरान कहते हैं, "सैलानी बहुत डरे हुए थे. उनके बच्चे सहमे हुए थे. इसलिए उन्होंने यहाँ से जाना ही उचित समझा."

'नकली शिवलिंग'

अब्दुल रशीद डंगोला हाउसबोट हिल्टन के मालिक हैं. उनका कहना है अमरनाथ गुफ़ा में नकली शिवलिंग होने की ख़बर आते ही धंधा आधा मंदा हो गया था. बम धमाकों ने रही-सही कसर निकाल दी.

घाटी
सैलानियों को अपने बच्चों और परिवार की चिंता सता रही है

इसके बावजूद अभी भी घाटी में थोड़े-बहुत पर्यटक मौजूद हैं जो यहाँ से जाने की नहीं सोच रहे हैं. लेकिन वे भी डरे डरे से हैं.

नागपुर के मुरली दत्त कहते हैं, "हम लोगों को भी लगता है कि हम यहाँ से अपने घर सही सलामत निकल जाएँ."

नागपुर की एक महिला संगीता कहती हैं, "कश्मीर तो स्वर्ग जैसा है. हमारे दिल में तो यही ख़्वाहिश है कि हम बार-बार यहाँ आएँ. लेकिन जो धमाके होते हैं या फिर गोलीबारी होती है, इसके कारण बहुत डर लगता है. ऐसा लगता है कि कहीं यह स्वर्ग नष्ट न हो जाए."

मुख्यमंत्री

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि पर्यटक अपनी बुकिंग रद्द कर घाटी से लौट रहे हैं.

दूसरी ओर पर्यटन विभाग के अधिकारी यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि पर्यटन उद्योग पर कोई बुरा प्रभाव पड़ा है.

मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल में जाकर सैलानियों को कश्मीर आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे

जम्मू कश्मीर पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक जीएन कसबा कहते हैं कि इस साल पर्यटन के पहले दौर में अब तक के सभी रिकॉर्ड टूट गए हैं.

वे कहते हैं कि कश्मीर में पर्टयकों का पहला दौर 15 जून तक रहता है. इस दौरान गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के स्कूलों में छुट्टियाँ रहती हैं.

कसबा कहते हैं कि 15 जून के बाद सैलानियों की संख्या में कमी होने लगती है. वे कहते हैं कि विस्फोटों के कारण कोई बड़ी संख्या में बुकिंग रद्द नहीं हुए हैं.

इस बीच मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद शीघ्र ही पश्चिम बंगाल का दौरा कर वहाँ के लोगों को कश्मीर आने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बना रहे हैं.

हाल में श्रीनगर में जो बम विस्फोट हुए उनमें मरने वालों में कम से कम नौ व्यक्ति पश्चिम बंगाल से थे.

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