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भारत ने अग्नि-3 का परीक्षण किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाली मिसाइल अग्नि-3 का परीक्षण किया है. इसकी मारक क्षमता 3500 किलोमीटर मानी जा रही है. इस मिसाइल का रविवार की सुबह उड़ीसा के भद्रक तट से परीक्षण किया गया. ख़बरों के अनुसार इस मिसाइल की मारक क्षमता चीन के बीजिंग और शंघाई शहरों तक है. ज़मीन से ज़मीन से तक मार करनेवाली यह मिसाइल एक हज़ार किलोग्राम वज़न तक ले जा सकती है. उल्लेखनीय है कि इसके पहले अग्नि-3 का प्रक्षेपण दो बार स्थगित करना पड़ा था. तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने इसके सन् 2003 के अंत में परीक्षण की घोषणा की थी. लेकिन बाद में इस मिसाइल के मध्य 2004 में प्रक्षेपण करने की बात कही गई थी. प्रेक्षकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में परीक्षण टालना पड़ा था. मिसाइल कार्यक्रम ग़ौरतलब है कि भारत ने अग्नि-1 और अग्नि-2 मिसाइलों को सेना में शामिल कर लिया है. इसके पहले भारत कम दूरी तक मार करने वाले और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाले 'अग्नि-2' का सफल परीक्षण कर चुका है. अग्नि-2 की मारक क्षमता 2000 से 2500 किलोमीटर तक है. भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान ने 1983 में मिसाइलों के विकास का एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया था जिसके तहत पाँच मिसाइलों का विकास किया जा रहा है. अग्नि श्रृंखला की पहली मिसाइल का परीक्षण 22 मई 1989 को किया गया था. अग्नि श्रृंखला के अलावा चार अन्य मिसाइलों के नाम हैं - पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग. पृथ्वी सतह-से-सतह तक मार करनेवाली कम दूरी की मिसाइल है. आकाश और त्रिशूल सतह-से-हवा में मार करनेवाली मिसाइलें हैं और नाग टैंकरोधी मिसाइल है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'आकाश' मिसाइल के दो सफल परीक्षण28 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत ने एक और मिसाइल परीक्षण किया07 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस भारत ने अग्नि-2 का परीक्षण किया29 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस परमाणु हथियारों के मुद्दे पर बातचीत14 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस मिसाइलें वापस लेने का अभियान31 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान ने किया शाहीन-2 का परीक्षण19 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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