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भारत ने अग्नि-2 का परीक्षण किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने रविवार को अपने ही देश में बनी सतह-से-सतह पर मार करनेवाली मिसाइल अग्नि-2 का परीक्षण किया. ये परीक्षण उड़ीसा की सीमा से लगी बंगाल की खाड़ी में व्हीलर्स आइलैंड स्थित परीक्षण केंद्र पर किया गया. इस अवसर पर भारत के रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार वी के अत्रे और अन्य अधिकारियों के अलावा कई रक्षा वैज्ञानिक उपस्थित थे. पिछले पाँच वर्षों में अग्नि-2 का ये तीसरा परीक्षण था. इससे पहले 11 अप्रैल 1999 और 17 जनवरी 2001 को अग्नि-2 का परीक्षण किया गया था. रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान द्वारा विकसित अग्नि-2 की मारक क्षमता 2000 से 2500 किलोमीटर तक है. अग्नि-2, 1000 किलोमीटर तक के प्रक्षेपास्त्र का वहन कर सकता है जिसमें परमाणु हथियार भी हो सकते हैं. मिसाइल कार्यक्रम रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान ने 1983 में मिसाइलों के विकास का एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया था जिसके तहत पाँच मिसाइलों का विकास किया जा रहा है. अग्नि श्रृंखला की पहली मिसाइल का परीक्षण 22 मई 1989 को किया गया था. अग्नि श्रृंखला के अलावा चार अन्य मिसाइलों के नाम हैं - पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग. पृथ्वी सतह-से-सतह तक मार करनेवाली कम दूरी की मिसाइल है. आकाश और त्रिशूल सतह-से-हवा में मार करनेवाली मिसाइलें हैं. नाग टैंकरोधी मिसाइल है. |
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