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नॉर्वे शांति दूत का भारत दौरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका संकट सुलझाने की कोशिश में लगे नॉर्वे के मुख्य वार्ताकार एरिक सोलहीम ने कहा है कि जब तक तमिल विद्रोहियों और सरकार दोनों ही पक्ष संघर्षविराम को लागू करने के लिए गंभीर नहीं तब तक वहाँ शांति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. सोलहीम श्रीलंका की ताज़ा स्थिति की जानकारी देने के लिए शनिवार को भारत के दौरे पर थे जहाँ उन्होंने विभिन्न नेताओं से मुलाक़ात की. सोलहीम ने श्रीलंका की स्थिति को 'ख़तरनाक' क़रार दिया. उन्होंने कहा कि श्रीलंका के दोनों पक्ष शायद यह सोचते हैं कि संकट को हल करने के लिए एक छोटा युद्ध ज़रूरी है हालाँकि इतिहास ने दिखाया है कि कोई भी युद्ध छोटा नहीं होता. सोलहीम ने तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार से अपील की है कि वे एक दूसरे पर हमला करना बंद करें और शांति स्थापना के लिए की जा रही कोशिशों को मौक़ा दें. शांति दूत सोलहीम ने कहा कि पहले लिए गए फ़ैसलों पर अमल करने में दिक्कतें आने से ज़्यादा मुश्किलें बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि नॉर्वे ने अभी तक दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता के छह दौर करा दिए हैं. सोलहीम ने अलबत्ता इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया कि श्रीलंका संकट को सुलझाने के लिए भारत क्या भूमिका अदा कर सकता है. इस बारे में उन्होंने कहा कि भारत की भूमिका का एक अलग इतिहास है और यह भारत पर निर्भर है कि वह इस संकट को सुलझाने में क्या भूमिका अदा करना चाहता है. इस बीच शांति दल के एक अन्य सदस्य जॉन हैनसेन बेउअर ने कहा कि तमिल विद्रोहियों और सरकारी अधिकारियों में शांतिवार्ता का अगला दौर जून में नॉर्वे में करने पर सहमति हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें एलटीटीई का नौसैनिक बेड़े पर बड़ा हमला11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई से मतभेद सुलझाना चाहते हैं'09 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जापानी दूत की विद्रोहियों से मुलाक़ात09 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में कठिन है शांति की राह12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका समय चक्र - 112 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका समय चक्र - 212 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई विद्रोहियों ने विरोधियों को मारा'30 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस दोनों पक्षों से शांतिवार्ता की अपील28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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