|
मनमोहन सरकार ने दो साल पूरे किए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन या यूपीए सरकार ने सोमवार को सत्ता में अपना दूसरा साल पूरा कर लिया. यूपीए सरकार का एक साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ख़ुद अपनी सरकार को 10 में से 6 अंक दिए थे. लेकिन दूसरा साल पूरा होने पर सरकार ने कोई तामझाम नहीं किया है और न ही पहली वर्षगांठ की तरह मीडिया में अपनी उपलब्धियों को गिनाया है. माना जा रहा है कि जनता के बीच अब भी प्रधानमंत्री की छवि पाक साफ़ बनी हुई है. हालांकि उनकी सरकार को उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण के मुद्दे से जूझना पड़ रहा है. प्रेक्षकों का मानना है कि आगे की वर्षों में मनमोहन सिंह सरकार पर विपक्षी गठबंधन एनडीए से कम और वामपंथी दलों का दबाव ज़्यादा रहेगा. मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा आंतरिक समस्याओं से जूझ रही है. पिछले साल सरकार का एक साल पूरे होने पर एनडीए ने जोर शोर से विरोध जताया था और एक चार्जशीट जारी की थी. लेकिन इस बार वह विरोध में उतनी मुखर नज़र नहीं आ रही है. वामपंथियों का दबाव दूसरी ओर विधानसभा चुनावों में भारी जीत के बाद वामपंथी दलों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.संसद में भी वामदल ‘कभी नरम कभी गरम’ की नीति अपना रहे हैं. इधर चुनाव के पहले वामपंथी दलों ने यह बार बार साफ़ कर दिया था कि चुनाव के बाद वे यूपीए सरकार के साथ रिश्तों को फिर से परिभाषित करने की कोशिश करेंगे. वामपंथी आर्थिक नीतियों और विदेश नीति पर यूपीए सरकार के रुख़ से नाराज़ हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन का कहना है कि यूपीए सरकार समाज के समृद्ध वर्ग को ध्यान में रखकर सरकार चल रही है. वामपंथी दल मुंबई और दिल्ली हवाई अड्डों के निजीकरण और खुदरा क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने के मुद्दे पर नाखुश हैं. वामपंथी कहते हैं कि यह न केवल साझा न्यूनतम कार्यक्रम के ख़िलाफ़ हैं बल्कि आम जनता के हक में भी नहीं है. वामपंथी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मज़बूत करना चाहते हैं इसलिए कांग्रेस को केंद्र में समर्थन देना उनके लिए एक तरह की मज़बूरी भी है. कांग्रेस संतुष्ट सरकार विदेशी मोर्चे पर कई उपलब्धियाँ गिनाती है. इसमें वह अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौता और पाकिस्तान के साथ शांति की पहल को गिनाती है. सत्तारूढ़ कांग्रेस भी सरकार के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट नज़र आती है. हाल के असम, पांडिचेरी और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा और वह अपने सहयोगियों के साथ इन राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब रही. कांग्रेस का मानना है कि दो वर्षों में रोज़गार गारंटी और सूचना का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए. उसका कहना है कि ख़ासकर आर्थिक मामलों में काफ़ी अनुकूल माहौल है और माना जाने लगा है कि आर्थिक उदारीकरण का दौर जारी है. कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा सरकार चलाने का यह पहला अवसर है. दो साल का सफ़र यूपीए सरकार के लिए अपने काम की समीक्षा का एक अवसर भी है और चुनौती भी कि वह अपने वादों पर कितनी खरी उतरी है. | इससे जुड़ी ख़बरें यूपीए पर वामपंथी दलों का दबाव बढ़ेगा11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस चार दशक बाद जुड़े रिश्तों के तार18 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस मनमोहन सरकार का एक साल21 मई, 2005 | भारत और पड़ोस यूपीए के ख़िलाफ़ एनडीए की 'चार्जशीट'24 मई, 2005 | भारत और पड़ोस सरकार की नीतियों के विरोध में हड़ताल09 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में रोज़गार गारंटी योजना लागू 02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||