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नेपाल में अमरीकी कर्मचारियों को आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में क़ानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अमरीका ने काठमांडू में अपने दूतावास में काम कर रहे उन सभी कर्मचारियों को नेपाल छोड़ देने के लिए कहा है जिनकी वहाँ ज़रूरत नहीं है. महत्वपूर्ण है कि ये कदम राजधानी काठमांडू में सात राजनीतिक दलों की बुलाई रैली की पूर्वसंध्या पर उठाया गया है. राजनीतिक दलों का दावा है कि मंगलवार को बुलाई गई रैली काठमांडू में होने वाली सबसे बड़ी रैली होगी. इससे पहले हज़ारो प्रदर्शनकारी हर रोज़ वहाँ कर्फ़्यू के बावजूद प्रदर्शन कर रहे हैं. उधर काठमांडू के उत्तर-पूर्व में स्थित सिंधुपालचोक ज़िले में सैकड़ों माओवादियों ने ज़िले के प्रशासनिक कार्यालयों, पुलिस थानों और सैनिक छावनियों पर धावा बोल दिया. इसके बाद सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच झड़पें होने लगीं जिनमें कम से कम नौ लोग मारे गए. उधर राजशाही विरोधी व्यापक प्रदर्शनों को देखते हुए नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को फिर दिन का कर्फ़्यू लगा दिया गया था जो स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे उठा लिया गया.
लेकिन पिछले कई दिनों की तरह अनेक प्रदर्शनकारी फिर भी वहाँ जमा हुए हैं. विदेश मंत्रालय का आदेश समाचार एजेंसियों के अनुसार अमरीकी अधिकारियों ने बताया है कि विदेश मंत्रालय ने आदेश दिया है कि जिस भी कर्मचारी की नेपाल में ज़रूरत नहीं है वह नेपाल छोड़ दे. इसके बाद काठमांडू में अमरीकी दूतावास में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या आधी रह जाएगी. इस महीने की शुरुआत में अमरीका ने दूतावास में काम कर रहे ग़ैर-ज़रूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों से कहा था कि वे अपनी मर्ज़ी से नेपाल से बाहर जा सकते हैं. दूतावास के प्रवक्ता रोबर्ट ह्यूजिन्स ने कहा कि जिन लोगों को सोमवार को देश छोड़ने के लिए कहा गया है वे जल्द से जल्द देश से चले जाएँगे. अमरीकी विदेश मंत्रालय नेपाल में अन्य अमरीकी नागरिकों को भी ऐसी ही हिदायत दे रहा है. माओवादियों ने धावा बोला इससे पहले रविवार रात को माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष तब शुरू हुआ जब माओवादी विद्रोहियों ने सिंधुपालचोक ज़िले में धावा बोला. माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच लगभग छह घंटे मुठभेड़ चली. अधिकारियों के मुताबिक कई सरकारी कार्यालयों को नुकसान पहुँचा है. राजनीतिक पार्टियों के नेपाल नरेश के ख़िलाफ़ शुरु हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद माओवादियों का ये पहला बड़ा हमला है. इस जनांदोलन को माओवादियों का समर्थन भी हीसिल है. माओवादियों ने राजनीतिक पार्टियों के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए काठमांडू में अपने सशस्त्र अभियान को स्थगित कर दिया था लेकिन माओवादियों ने काठमांडू से बाहर अपना अभियान रोकने से इनकार किया है.
उधर जनांदोलन को देखते हुए सरकारी टीवी पर घोषणा के बाद काठमांडू में दिन का कर्फ़्यू फिल लागू किया गया. रविवार को राजधानी काठमांडू में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुईं थीं और कई जगह पर मंगलवार को भी झड़पें हुईं. राजनीतिक दलों और राजा ज्ञानेंद्र के बीच गतिरोध बना हुआ है. विपक्षी दल पहले ही नेपाल नरेश के उस प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं जिसमें उन्होंने राजनीतिक दलों से प्रधानमंत्री चुनकर सरकार का गठन की बात कही थी. सात राजनीतिक दलों का कहना था कि राजा को उस पूरे मसौदे को लागू करना चाहिए जो लोकतंत्र की स्थापना के लिए दिया गया है. |
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