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शुक्रवार, 21 अप्रैल, 2006 को 20:27 GMT तक के समाचार
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एक प्रदर्शनकारी की मौत
अंतिम संस्कार
बासु घिमिरे का अंतिम संस्कार जल्दबाज़ी में कर दिया गया
बासु घिमिरे की पत्नी सुनीता ने बासु को अंतिम बार जब जीवित देखा था वो थी गुरुवार की सुबह.

32 वर्षीय बासु गुरुवार को नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के विरोध में आयोजित रैलियों में हिस्सा लेने अपने घर से निकले लेकिन फिर लौट कर नहीं आ सके.

कुछ घंटों बाद रक्त से सना उनका निर्जीव शरीर अस्पताल में पड़ा था.

कहा जाता है कि प्रदर्शन के दौरान बासु को सुरक्षा बलों ने जमकर पीटा और फिर गोली मार दी.

शुक्रवार की सुबह जाकर ही बासु के घरवालों को उनकी मौत का समाचार मिला.

बासु के साले विष्णु राज चावलागल बताते हैं " मुझे पुलिस से एक फोन आया कि मैं अस्पताल जाऊं. वहीं मैने बासु की लाश देखी और शिनाख्त की."

 बासु आतंकवादी नहीं था. वो तो कारपेंटर था
सुनीता, बासु की पत्नी
वो कहते हैं " बासु के सीने पर गोली मारी गई थी. मुझे उसकी लाश देखकर चक्कर आने लगे थे."

जल्दबाज़ी में अंतिम संस्कार

इसके बाद बासु का शरीर तुरंत काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर लाया गया जहां उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

सफ़ेद क़फन में लिपटे बासु की नृशंस मौत का बस एक गवाह था खून से सनी उनकी कमीज़ जिससे उनका चेहरा ढंक दिया गया था.

जब अधिकारी बासु के घर पहुंचे तो चारों ओर दंगा नियंत्रण करने वाली पुलिस भी मौजूद थी.

सुनिता घिमिरे
सुनीता को दुख है कि उसके पति को आतंकवादी क़रार दिया गया

बासु की पत्नी सुनीता कहती हैं कि अधिकारियों ने उनसे कुछ खाली कागज़ातों पर हस्ताक्षर लिए और फिर बासु के अंतिम संस्कार में शामिल करने के लिए पशुपतिनाथ मंदिर लेकर आए.

सुनीता कहती हैं " मैंने पुलिसवालों से विनती की कि बासु के माता पिता का इंतज़ार किया जाए जो राजधानी से दूर रहते हैं लेकिन पुलिस ने मेरी बात नहीं सुनी."

नाराज़गी

बासु घिमिरे नेपाली कांग्रेस की युवा शाखा के सदस्य थे और युवा शाखा के कई लोग उनके अंतिम संस्कार में मौजूद थे.

सभी के चेहरों पर पुलिस के लिए घृणा और नाराज़गी के भाव थे. एक कार्यकर्ता गुरमिला आचार्य का कहना था " वो ऐसा कैसे कर सकते हैं. परिवार के बिना ही बासु का अंतिम संस्कार कर दिया गया. हिंदू धर्म में बिना परिवार के अंतिम संस्कार नहीं किया जाता."

बासु काठमांडू से दूर पहाड़ी शहर कलंकी के रहने वाले थे . उनके छोटे से घर में 21 वर्षीय सुनीता अब दीवारों को घूरती है.

अपने चार साल के बेटे के सर पर हाथ फिराती सुनीता कहती हैं कि उन्होंने रेडियो पर सुना कि पुलिस ने बासु को आतंकवादी क़रार दिया है.

टूटती आवाज़ में सुनीता बस इतना कह पाती है " बासु आतंकवादी नहीं था. वो तो कारपेंटर था."

सात साल पहले बासु और सुनीता की शादी हुई थी और सुनीता के अनुसार बासु राजनीतिक रुप से बहुत सक्रिय नहीं था.

सुनीता कहती है " कुछ बार प्रदर्शनों के लिए वो ज़रुर जाते थे लेकिन हर बार वापस आते थे लेकिन......"

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