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नेपाल में कर्फ़्यू, सरकार की कड़ी चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में राजा विरोधी प्रदर्शनों को देखते हुए राजधानी काठमांडू में कर्फ़्यू लगाया गया है और चेतावनी दी गई है कि कर्फ़्यू का उल्लंघन करने वालों को देखते ही गोली भी मारी जा सकती है. बुधवार को सरकार ने यह कर्फ़्यू 18 घंटे तक लगाने का ऐलान किया. उधर राजा के विरोध में ये प्रदर्शन कर रहे दलों और नेताओं ने गुरूवार को एक बड़ी रैली निकालने की योजना बनाई है जिसे देखते हुए ही सरकार ने कर्फ़्यू लगाया है. इससे पहले दो विपक्षी नेताओं को तीन महीने हिरासत में रखने के बाद बुधवार को रिहा कर दिया गया उधर नेपाली सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दक्षिण-पूर्वी ज़िले थापा में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी के महासचिव माधव कुमार नेपाल और नेपाली कांग्रेस के महासचिव राम चंद्र पौडेल को काठमांडू कते ज़िला जज ने रिहा किया. हालाँकि उनकी रिहाई के लिए कोई वजह नहीं बताई गई है. यह रिहाई ऐसे वक़्त पर हुई जब भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विशेष दूत कर्ण सिंह सुलह मिशन पर काठमांडू पहुँचे हैं. उधर राजा ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ पिछले दो हफ़्ते से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का दौर थमता नज़र नहीं आ रहा है. कर्ण सिंह के नेपाल दौरे को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कर्ण सिंह नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मिलेंगे. अपने इस मिशन में कर्ण सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला और शेर बहादुर देउबा से मुलाक़ात की है. भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन भी नेपाल पहुँचे हैं. विशेष दूत नियुक्त होने के बाद कर्ण सिंह ने कहा था कि वह नेपाल की लगातार ख़राब हो रही स्थिति से काफ़ी चिंतित हैं. लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि भारत नेपाल के अंदरूनी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहता लेकिन नेपाल की मदद अवश्य करना चाहता है. प्रदर्शन दक्षिण पूर्वी ज़िले झापा में नेपाली सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई जिन्हें मिलाकर राजा विरोधी प्रदर्शनों में अब तक कुल आठ प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं.
ये विरोध प्रदर्शन दो सप्ताह से चल रहे हैं. झापा इलाक़े में मौजूद पत्रकारों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के सिर में गोली लगी और उन्होंने तुरंत दम तोड़ दिया. इस बीच पोखरा में सुरक्षा बलों ने 250 से ज़्यादा शिक्षकों को हिरासत में ले लिया है, जो कर्फ़्यू का विरोध करते हुए प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे थे. अधिकारियों ने सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच मंगलवार को हुई भिड़ंत के बाद कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया था. इन प्रदर्शनों में हज़ारों लोग घायल भी हुए हैं. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने फ़रवरी 2005 को लोकतांत्रिक सरकार को बर्ख़ास्त करते हुए देश का शासन सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया था. उसी के बाद से वहाँ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें कर्ण सिंह नेपाल मिशन पर19 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में 25 अधिकारी गिरफ़्तार18 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस भारत ने नेपाल को लेकर प्रयास तेज़ किए18 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में गोलीबारी में एक और की मौत17 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में खाद्य पदार्थों की कमी17 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस काठमांडू में कर्फ़्यू, मोबाइल फ़ोन बंद08 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान झड़पें07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार ने 'संघर्षविराम' को ख़ारिज किया04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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