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कर्ण सिंह नेपाल मिशन पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ पिछले दो हफ़्ते से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का दौर थमता नज़र नहीं आ रहा है. इस बीच भारत के विशेष दूत कर्ण सिंह सुलह मिशन पर काठमांडू पहुँच गए हैं. कर्ण सिंह के नेपाल दौरे को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कर्ण सिंह नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मिलेंगे. भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन भी नेपाल पहुँचे हैं. विशेष दूत नियुक्त होने के बाद कर्ण सिंह ने कहा था कि वह नेपाल की लगातार ख़राब हो रही स्थिति से काफ़ी चिंतित हैं. लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि भारत नेपाल के अंदरूनी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहता लेकिन नेपाल की मदद अवश्य करना चाहता है. प्रदर्शन इस बीच पोखरा में सुरक्षा बलों ने 250 से ज़्यादा शिक्षकों को हिरासत में ले लिया है, जो कर्फ़्यू का विरोध करते हुए प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे थे.
अधिकारियों ने सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच मंगलवार को हुई भिड़ंत के बाद कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया था. मंगलवार को नेपालगंज में भी एक बड़ी रैली हुई और आकलन है कि इस रैली में 20 से 50 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने फ़रवरी 2005 को लोकतांत्रिक सरकार को बर्ख़ास्त करते हुए देश का शासन सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया था. उसी के बाद से वहाँ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में 25 अधिकारी गिरफ़्तार18 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस भारत ने नेपाल को लेकर प्रयास तेज़ किए18 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में गोलीबारी में एक और की मौत17 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में खाद्य पदार्थों की कमी17 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस काठमांडू में कर्फ़्यू, मोबाइल फ़ोन बंद08 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान झड़पें07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में हिंसा, दस की मौत06 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार ने 'संघर्षविराम' को ख़ारिज किया04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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