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चरख़ी जेल के क़ैदियों से बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान के न्याया उपमंत्री मोहम्मद क़ासिम हाशिमज़ई ने कहा है कि शनिवार को जिस जेल में हिंसा शुरू हो गई थी उसे रोकने के लिए अगर ज़रूरी हुआ तो बल प्रयोग भी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि क़ैदियों के साथ बातचीत चल रही है और सरकार शांतिपूर्ण हल निकालना चाहती है. राजधानी काबुल की पुल-ए-चरख़ी नामक जेल को सशस्त्र सुरक्षा बलों ने चारों ओर से घेर लिया है. इस जेल में 1300 से ज़्यादा क़ैदी हैं जिनमें तालेबान और अल क़ायदा के कुछ लड़ाके भी शामिल हैं. इस बीच जेल के क़ैदियों ने वहाँ के कुछ हिस्सों पर क़ब्ज़ा करने के बाद अपनी मांगों की एक सूची जारी की है. क़ैदी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करना चाहते हैं और बेहतर भोजन के अलावा जेल के वर्दी क़ानून में भी बदलाव की मांग कर रहे हैं. राजधानी काबुल में स्थित पुल-ए-चरख़ी जेल के अंदर दंगों की शुरूआत शनिवार को हुई और एक मानवाधिकार संगठन के पदाधिकारी ने इन दंगों में चार लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. 36 घायल भी हुए हैं. जेल के अधिकारी इससे इनकार करते हैं और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह मौतें किस तरह हुईं. घेराबंदी दंगों के चौबीस घंटों के बाद भी सुरक्षा बलों ने जेल के चारों ओर घेरा डाल रखा है.
अधिकारियों का कहना है कि इन दंगों में तालेबान और अल क़ायदा के सदस्यों के अलावा साधारण अपराधी भी शामिल हैं. उनका कहना है इन क़ैदियों के पास हथियारों के नाम पर चाकू और कामचलाऊ मुगदर हैं लेकिन बंदूकें नहीं हैं. शनिवार और रविवार की रात को जेल के अंदर से बंदूकें चलने की आवाज़ भी सुनाई दी लेकिन सोमवार को माहौल शांत नज़र आ रहा था. जेल के बाहर मौजूद बीबीसी के स्थानीय संवाददाता बिलाल सरवरी का कहना है कि सोमवार को दो बार बंदूक चलने की आवाज़ आई और सुरक्षाकर्मियों की संख्या भी कम थी. बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि सैकड़ो क़ैदी अब भी महिलाओं वाली जेल में घुसे हुए हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें डर है कि कुछ क़ैदियों ने वहाँ बंद महिला क़ैदियो के साथ बलात्कार भी किया हो. इस दंगे की शुरूआत शनिवार की शाम में हुई जब जेल के ब्लॉक नंबर दो में बंद 1300 क़ैदियों ने जेल की वर्दी के क़ानून में आए बदलावों का विरोध करना शुरू किया. अफ़गान जेल के निदेशक जनलर सलाम बख़्शी ने बीबीसी को बताया, "ये अल क़ायदा और तालेबान का काम है. हिंसा भड़का कर वो जेल से फ़रार होना चाहते हैं. लेकिन अभी तक किसी को सफलता नहीं मिली है." पुल-ए-चरख़ी काबुल के बाहर बना हुआ एक बहुत बड़ा जेल है और ये सत्तर के दशक में बना था. | इससे जुड़ी ख़बरें कंधार धमाके में 14 लोगों की मौत07 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़गानिस्तान में 30 साल बाद संसद का सत्र19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस बिना सुनवाई आधी उम्र कटी जेल में13 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 54 साल जेल के लिए तीन लाख का मुआवज़ा09 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस जेल पर माओवादी हमला, पाँच की मौत14 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस हज़ारों क़ैदियों को मुक्तिदाता की प्रतीक्षा23 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस जेल में 'रूम सर्विस' का मेन्यू गजट में छपा15 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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