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सोमवार, 14 नवंबर, 2005 को 07:13 GMT तक के समाचार
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जेल पर माओवादी हमला, पाँच की मौत
पुलिसकर्मी
माओवादियों ने हमले से पहले जहानाबाद शहर में बिजली आपूर्ति काट दी थी
माओवादी चरमपंथियों ने बिहार के जहानाबाद में पुलिस ठिकानों और जेल पर एक साथ हमला किया है. हमले में दो पुलिसकर्मियों समेत पाँच लोग मारे गए हैं.

पूरे इलाक़े में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है.

अधिकारियों के अनुसार रविवार रात नौ बजे भारी संख्या में माओवादी चरमपंथियों ने राजधानी पटना से 60 किलोमीटर दूर जहानाबाद ज़िले के मुख्यालय पर धावा बोल दिया.

जहानाबाद के ज़िलाधिकारी कुमार राणा अवधेश ने बीबीसी हिंदी सेवा को बताया कि 500 से 800 की संख्या में चरमपंथियों ने ज़िला पुलिस मुख्यालय या पुलिस लाइन, पुलिस स्टेशन और जेल पर एक साथ हमला किया.

 शहर के बीचोंबीच स्थिति जेल पर किसी हमले की हमें आशंका नहीं थी
जिलाधिकारी कुमार राणा अवधेश

जेल से क़रीब 300 क़ैदियों को छुड़ाने की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, "हमलोगों ने ज़िला पुलिस मुख्यालय को बचाने को प्राथमिकता दी."

राणा अवधेश ने कहा कि पुलिस लाइन में उपलब्ध पुलिस जवानों की संख्या कम थी ऐसे में वहाँ शस्त्रागार की रक्षा करना पहला काम था.

उन्होंने कहा, "शहर के बीचोंबीच स्थिति जेल पर किसी हमले की हमें आशंका नहीं थी."

ज़्यादा ख़ून-ख़राबा भी जेल में ही हुआ है जहाँ चरमपंथियों ने किसानों के हथियारबंद संगठन रणवीर सेना के एक वरिष्ठ नेता बड़े शर्मा की हत्या कर दी.

मृतक के रिश्तेदार
बिहार और पड़ोसी राज्य झारखंड के बड़े इलाक़े में सक्रिय हैं माओवादी चरमपंथी

गोलीबारी में एक पुलिकर्मी की मौक़े पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया. यहाँ कई अन्य लोग घायल भी हुए.

जहानाबाद से स्थानीय पत्रकार राजकुमार के अनुसार पुलिस लाइन के पास भी एक शव मिला है, जबकि एक अन्य शव शहर से लगी नदी के पास मिला है. इन शवों की पहचान नहीं हो पाई है.

अधिकारियों के अनुसार माओवादी चरमपंथी जेल से अपने एरिया कमांडर अजय कानू समेत अनेक क़ैदियों को छुड़ा ले गए.

चरमपंथी अपने साथ रणवीर सेना के कई क़ैदियो को भी ले गए हैं.

ख़बर है कि माओवादी बड़ी मात्रा में हथियार भी लूट ले गए हैं.

'ऑपरेशन जेल ब्रेक'

रिपोर्टों के अनुसार जेल से अगवा कर के ले जाए गए क़ैदियों के परिजनों में काफ़ी रोष है और पूरे इलाक़े में भारी तनाव की स्थिति है.

बिहार के पुलिस महानिदेशक आशीष रंजन सिन्हा ने बीबीसी को बताया कि माओवादियों की योजना के बारे में पुलिस को भनक थी, लेकिन इतने बड़े हमले का अंदेशा नहीं था.

उन्होंने कहा कि पुलिस लाइन में भारी मात्रा में हथियार और गोली-बारूद मौजूद होने के कारण सुरक्षा बलों ने उसकी रक्षा करने को जेल की सुरक्षा से ज़्यादा प्राथमिकता दी.

माओवादियों के आधुनिक हथियारों और बारूदी सुरंगों के सामने बेबस हैं बिहार पुलिस के जवान

सिन्हा ने कहा कि उत्तर बिहार में तीसरे चरण के चुनाव के कारण भी ज़िले में पुलिस बल की संख्या कम थी.

उन्होंने कहा कि राजधानी पटना से विशेष पुलिस दस्ते भेजे गए हैं जो जेल से भगाए गए क़ैदियों का पता लगाने और माओवादी चरमपंथियों को पकड़ने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं.

जेल परिसर में माओवादी कुछ पर्चे भी छोड़ गए हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(माओवादी) के इस पर्चे में रविवार के हमले का नाम दिया है 'ऑपरेशन जेल ब्रेक'.

पर्चे में कहा गया है कि उन्होंने जानबूझ कर अपनी कार्रवाई के लिए रूसी क्रांति का दिन 13 नवंबर चुना.

पटना से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार माओवादियों के बढ़ते हमलों के बीच राज्य की पुलिस ख़ुद को बेबस पा रही है, और उनके पास नक्सलियों के आधुनिक हथियारों और बारूदी सुरंगों का समुचित जवाब नहीं है.

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