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बुधवार, 22 फ़रवरी, 2006 को 09:25 GMT तक के समाचार
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परमाणु चिंताओं को खारिज किया
भाभा परमाणु केंद्र
भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही है
भारत ने इस दलील को खारिज किया है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते से भारत और अधिक परमाणु हथियार तैयार कर सकेगा.

इस समझौते को अभी अमरीका संसद को अनुमोदित करना है. इसके बाद भारत को परमाणु ईंधन और तकनीक के क्षेत्र में अमरीकी सहयोग मिल सकेगा.

इस समझौते के आलोचकों का कहना है कि इससे परमाणु हथियारों का विस्तार होगा. दोनों देश राष्ट्रपति बुश की अगले महीने होनेवाली भारत यात्रा से पहले इस अंतिम रूप देना चाहते हैं.

भारत के अमरीका में राजदूत रोनेन सेन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम स्वविकसित है और इसे किसी अन्य देश की सहायता की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने वाशिंगटन स्थित प्रेस क्लब में बातचीत में कहा,'' हमें इन्हें किसी तीसरे देश से छुपकर हासिल नहीं किया है.''

 भारत का परमाणु कार्यक्रम स्वविकसित है और इसे किसी अन्य देश की सहायता की ज़रूरत नहीं है
रोनेन सेन, भारतीय राजदूत

उनका कहना था,'' इस बहस को यहाँ (अमरीका) परमाणु अप्रसार के पक्षधरों ने उड़ा लिया है और भारत में आत्मनिर्भरता के हिमायती इसके विरोध में इकट्ठे हो गए हैं.''

समझौता

यह समझौता भारत के असैनिक और सैन्य परमाणु सुविधाओं को अलग अलग करने के मुद्दे पर अटका हुआ है.

पिछले साल जुलाई में भारत और अमरीका के बीच असैनिक कार्यों के लिए परमाणु समझौता हुआ था.

लेकिन अब भी दोनों के बीच मतभेद बने हुए हैं. समझौते के तहत भारत को असैनिक और सैन्य परमाणु सुविधाओं की घोषणा करनी है.

असैनिक कार्यों के लिए परमाणु सविधाओं को अमरीका से ईंधन और तकनीकी सहायता मिलेगी. साथ ही इनका अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण भी होगा. लेकिन सैन्य सुविधाएँ निरीक्षण की परिधि से बाहर होंगी.

प्रेक्षकों का कहना है कि भारत की अनेक अनुसंधान सुविधाएँ दोनों क्षेत्रों में योगदान देती हैं. इन दोनों को अलग करना आसान नहीं है.

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