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संसद के खाने से चिकन हटाया गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय संसद के खाने से चिकन को हटा दिया है. इसके पहले सरकारी विमान सेवा 'इंडियाना', भारतीय रेल और निजी एयरलाइन जेट एयरवेज़ ने भी अपनी सेवाओं में चिकन देना बंद कर दिया था. दूसरी ओर बर्ड फ्लू के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद से मुर्गीपालन के कारोबार को भारी नुक़सान उठाना पड़ रहा है. संसद के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि संसद की खाद्य समिति के अध्यक्ष येरेन नायडू के निर्देश पर संसद की कैंटीन से चिकन को हटा दिया गया है. अधिकारी ने बताया कि इस प्रतिबंध की कोई वजह नहीं बताई गई है. रेल मंत्रालय और सरकारी विमान सेवा 'इंडियाना' ने पहले ही चिकन पेश करना बंद कर दिया है. संसद की कैंटीन में सत्र के दौरान लगभग एक हज़ार लोग रोज़ाना खाना खाते हैं. दूसरी ओर भारत सरकार के अधिकारी और पोल्ट्री उद्योग के लोग लोगों को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि चिकन अच्छी तरह से पका हो तो उसे खाना सुरक्षित है. बिक्री में गिरावट पिछले सप्ताह महाराष्ट्र में बर्ड फ्लू की ख़बर फैलने के बाद पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री में भारी गिरावट आई है.
इससे जुड़े लोगों का कहना है कि अब तक लगभग दो अरब रूपए का नुक़सान हो चुका है और आने वाले दिनों में यह और भी बढ़ सकता है क्योंकि अभी सिर्फ़ महाराष्ट्र और गुजरात की मुर्गियों में घातक वायरस होने की पुष्टि हुई है. कुल मिलाकर देश भर में अब तक पाँच लाख मुर्गियों को बीमारी रोकने की कोशिश के तहत मारा जा चुका है. पहले तय किया गया था कि बर्ड फ्लू से संक्रमित इलाक़े के तीन किलोमीटर के दायरे में सभी मुर्गियाँ मार दी जाएँगी. लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस दायरे को बढ़ाकर दस किलोमीटर कर दिया है यानी बहुत बड़ी संख्या में मुर्गियों को एहतियात के तौर पर मारा जाएगा, जिससे पोल्ट्री व्यसायियों का ख़ासा नुक़सान होगा. सरकार ने वादा किया है कि वह पोल्ट्री उद्योग की हरसंभव मदद करेगी. भारत के ज़्यादातर शहरों में मुर्गियाँ पहले के मुक़ाबले आधी क़ीमत पर बिक रही हैं. |
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