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सोमवार, 20 फ़रवरी, 2006 को 14:58 GMT तक के समाचार
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...ताकि सीमा के दोनों ओर के लोग मिल सकें

पूंछ
कई सरकारी संगठन निर्माण कार्य में जुटे हैं
जम्मू-कश्मीर के पूंछ ज़िले में पहले जहाँ भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी का ख़ौफ़ था वहीं आज बदलते माहौल में दोनों तरफ के लोगों को मिलाने के लिए सड़क का निर्माण कार्य ज़ोरों पर है.

भारत और पाकिस्तान ने फ़ैसला किया है कि पूंछ से रावलकोट के बीच सड़क मार्ग 31 मार्च तक बसों की आवाजाही के लिए तैयार हो जाएगा.

पिछले वर्ष सात अप्रैल को श्रीनगर से मुज़फ़्फ़राबाद का सड़क संपर्क शुरू हुआ था. पिछले वर्ष अक्तूबर में भूकंप के बाद श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद का रास्ता बंद हो गया था.

लेकिन इसके बावजूद लगभग 500 लोग इस रास्ते से भारतीय और पाकिस्तानी प्रशासित कश्मीर के लोग अपने संबंधियों को मिलने आए और गए हैं.

निर्माण कार्य

जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन, सेना और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) मिलकर पूंछ से चकन-दा-बाग पर नियंत्रण रेखा तक लगभग 10 किलोमीटर सड़क निर्माण में जुटे हैं.

 श्रीनगर की तरफ से अगर हमें पाकिस्तान जाना हो तो तीन से चार दिन लगते थे, अब इसी रास्ते से हम कुछ ही घंटों में अपने रिश्तेदारों के पास पाकिस्तान में पहुँच सकते हैं
टेलर मास्टर बग़दाद

पहले डेढ़ किलोमीटर सड़क की मरम्मत का काम लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) कर रहा है, अगले 2.7 किलोमीटर बीआरओ कर रही है जिसमें नई सड़क बनाने और पुरानी सड़कों की मरम्मत का काम हो रहा है.

बाक़ी के सड़क का निर्माण सेना कर रही है जिसके तहत बारूदी सुरंगें हटाने का काम भी शामिल है.
पूंछ से नियंत्रण रेखा तक सड़क पर बिजली, पानी, संचार और बाक़ी सभी प्रकार की व्यवस्था का ज़िम्मा राज्य प्रशासन पर है.

कस्टम और इमिग्रेशन (आव्रजन) के लिए निर्माण भी उन्हीं को करना है. सड़क के बीच लोगों की ज़मीनें हैं जिन्हें मुआवज़ा देकर अधिकार में लेने का काम भी है.

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस रास्ते के निर्माण पर लगभग 10 करोड़ रूपए ख़र्च आएंगे.

उत्साह

इस सड़क मार्ग के खुलने की ख़बर को लेकर पूंछ और आसपास के लोगों में ख़ुशी और उत्साह का माहौल है क्योंकि इस क्षेत्र में वैसे लोग सबसे अधिक हैं जिनके परिजन पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हैं.

सेना भी निर्माण कार्यों में जुटी हुई है

एक स्कूल में अध्यापक ताज मोहम्मद ने बीबीसी को बताया कि इस इलाक़े में ऐसा कोई घर नहीं जिनके रिश्तेदार उस पार नहीं रहते.

बनवात के एक टेलर मास्टर बग़दाद भी बहुत ख़ुश है कि यह रास्ता खुल रहा है. उन्होंने बताया, "श्रीनगर की तरफ से अगर हमें पाकिस्तान जाना हो तो तीन से चार दिन लगते थे, अब इसी रास्ते से हम कुछ ही घंटों में अपने रिश्तेदारों के पास पाकिस्तान में पहुँच सकते हैं."

इस रास्ते के खुलने के समाचार से पूंछ में पहली बार आर्थिक गतिविधियाँ होती दिख रही हैं. नियंत्रण रेखा के पास दूरदराज़ पहाड़ी क्षेत्र और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित होने के कारण यहाँ पर किसी प्रकार का विकास संभव नहीं था.

एक बेरोज़गार युवक माजिद ख़ान ने कहा कि वे यहाँ एक चाय का ढाबा खोलना चाहते हैं. पूंछ में स्टार होटल के मालिक मंज़ूर अहमद लोन ने भी अपने होटल की मरम्मत का काम शुरू किया है क्योंकि अब उन्हें अच्छी कमाई की उम्मीद है.

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