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मीरवाइज़ ने की जम्मू में पहली रैली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने पहली बार हिंदू बहुल इलाक़े जम्मू में एक सार्वजनिक सभा की. उन्होंने दावा किया कि ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेस के पास कश्मीर मसले के हल की चाबी है. हालाँकि जम्मू पहुँचने पर हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज़ का विरोध भी हुआ. हवाई अड्डे पर शिवसेना समर्थकों ने उनके ख़िलाफ़ नारे भी लगाए. जम्मू में उनकी पहली सार्वजनिक सभा में क़रीब 300 लोग मौजूद थे. उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत प्रशासित कश्मीर के सभी लोग और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के सभी लोग अपने मतभेद भुला दें. हल मीरवाइज़ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक जटिल मसला है और हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस का गठन ही इस मसले के हल के लिए हुआ था. उन्होंने कहा, "कश्मीर मसले के हल की चाबी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के पास है. इसके लिए एक-एक करके क़दम उठाना होगा. हम दोनों तरफ़ के लोगों को क़रीब लाए हैं और शांतिपूर्ण महौल तैयार किया है." उन्होंने अपनी वो बात दोहराई कि मसले के हल की दिशा में पहला क़दम सफलतापूर्वक बढ़ाने के बाद हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस स्वशासन, सैनिकों को हटाए जाने और संयुक्त कश्मीर के बारे में विस्तार से जानकारी देगा. उन्होंने कश्मीर में शांति के लिए भारत और पाकिस्तान की ओर से भरोसा बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे क़दमों का स्वागत किया. लेकिन उनका कहना है कि इस दिशा में सबसे बड़ा क़दम वो होगा, जिसमें एक प्रक्रिया के तहत कश्मीर से सैनिकों की वापसी होगी. मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आधार पर कश्मीर का विभाजन हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस को मंज़ूर नहीं है. हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष तीन दिन तक जम्मू में रहेंगे और उनकी कश्मीरी हिंदुओं से भी मिलने की योजना है. | इससे जुड़ी ख़बरें सज्जाद लोन गुट को बातचीत का न्योता10 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस मीरवाइज़ बातचीत का नेतृत्व करेंगे01 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस हुर्रियत से बातचीत को लेकर उम्मीदें03 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर समस्या के हल की कोशिश हो'05 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सैनिकों की संख्या में कटौती संभव05 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस हुर्रियत के गिलानी गुट में टूट22 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस कश्मीरी पंडितों और हुर्रियत की बातचीत19 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस सरकार 'कश्मीरियों' से बातचीत को तैयार08 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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