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हुर्रियत से बातचीत को लेकर उम्मीदें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अलगाववादी गुट हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस से बातचीत को लेकर काफ़ी उम्मीद जताई है. दूसरी ओर हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत कश्मीर पर केंद्रित होगी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने दक्षिण भारत के दौरे में कहा कि वक्त आ गया है कि कश्मीरी लोगों को मुश्किलों से निजात मिलनी चाहिए. हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वार्ता कश्मीर पर केंद्रित होगी. साथ ही इससे जुड़े अन्य मुद्दों जैसे मानवाधिकारों का उल्लंघन और बंदियों की रिहाई पर भी बातचीत होगी. उनका कहना था कि कश्मीर राजनीतिक मुद्दा है और इसे राजनीतिक रूप में ही सुलझाया जाना चाहिए. लेकिन सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्ववाले हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े ने इस बातचीत का विरोध किया है. गिलानी का कहना है कि इस बातचीत से कुछ निकलनेवाला नहीं है. इसका भी नहीं वहीं नतीज़ा होगा जो पहले हुई बातचीत का हुआ है. न्यौता ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुर्रियत नेताओं की बातचीत पाँच सितंबर को होनी है और हुर्रियत चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ बातचीत का नेतृत्व करेंगे.
यूपीए सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहला मौक़ा है कि जब हुर्रियत नेता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात कर रहे हैं. इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के उदारवादी धड़े को पांच सितंबर को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था. दोनों पक्षों के बीच बातचीत पिछले एक वर्ष से रूकी हुई है. |
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