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गिलानी को ओआईसी का निमंत्रण नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस्लामिक संगठन सम्मेलन(ओआईसी) ने कश्मीरी कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी को अपनी बैठक में आमंत्रित नहीं किया है. गिलानी ने आरोप लगाया है कि इसके पीछे पाकिस्तान सरकार का हाथ है. पिछले दिनों गिलानी ने पाकिस्तान सरकार के निमंत्रण पर पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था. गिलानी का कहना था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ कश्मीर मसले पर अपने देश के रुख़ से पीछे हट गए हैं. यमन में 20 जुलाई से ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है. इस बैठक में कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को भी अक्सर बुलावा मिलता है. निमंत्रण लेकिन इस बार ओआईसी ने कट्टरपंथी नेता गिलानी को बैठक में नहीं बुलाया है. हालाँकि हुर्रियत कॉफ़्रेंस के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ को बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. सैयद अली शाह गिलानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "चूँकि पाकिस्तान मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ की अगुआई वाले हुर्रियत को असली हुर्रियत मानता है और इसलिए अपने निर्णय को सही साबित करने के लिए उसने अपने अच्छे संबंधों का इस्तेमाल करके ओआईसी से उमर फ़ारूक़ के हुर्रियत कांफ़्रेस को निमंत्रण दिलवा दिया." मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ के अलावा जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक और डेमोक्रेटिक फ़्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शब्बीर शाह को भी बैठक में आने का निमंत्रण मिला है. बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार ओआईसी की बैठक का न्यौता न मिलना गिलानी के लिए बड़ा झटका है. |
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