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अलगाववादी नेता भारत लौटे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेता एक पखवाड़े की पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की यात्रा के बाद गुरुवार को वापस लौट आए. इन नेताओं का कहना था कि उनकी यात्रा सफल रही और पाकिस्तान सरकार, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के नेता और वे एक एकमत थे. ग़ौरतलब है कि पहली बार अलगाववादी नेताओं को सीमापार कर पाकिस्तान जाने की अनुमति दी गई थी. अमन सेतु पार करने के बाद हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कश्मीर विवाद के समाधान की विभिन्न संभावनाओं पर उन्होंने पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत की है. उनका कहना था,'' हम कुछ मुद्दों पर सहमत थे तो कुछ पर असहमत थे. लेकिन यह पहला चरण है और हम इस प्रक्रिया को आगे ले जाना चाहते हैं." मीरवाइज़ उमर फ़ारुक ने कहा कि उनकी जेहाद कॉउंसिल के प्रमुख सैयद सलाउद्दीन से मुलाक़ात हुई. उनका कहना था," मैंने उनसे साफ़ तौर से कह दिया कि उन्हें मौजूदा परिस्थिति में राजनीतिक नेतृत्व पर पूरा विश्वास व्यक्त करना चाहिए.'' अपील अन्य अलगाववादी नेता और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक ने कहा," यात्रा रचनात्मक थी लेकिन आशावादी नहीं थी." उनका कहना था कि पाकिस्तान अथवा भारत सरकार ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि कश्मीरियों को बातचीत में शामिल किया जाएगा. पाकिस्तान के दौरे के दौरान उमर फ़ारुक़ ने पाकिस्तान के चरमपंथियों से अपील की थी कि वे भी कश्मीर समस्या हल करने के लिए शांति प्रक्रिया में शामिल हों. भारत सरकार ने इस दल को श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस से यात्रा करने की अनुमति दी थी जहाँ से वे इस्लामाबाद गए थे. |
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