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भारतीय कश्मीर के नेताओं का स्वागत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू कश्मीर के अलगाववादी संगठन सर्वदलीय हुर्रियत कांफ़्रेंस और कुछ अन्य कश्मीरी संगठनों के नेता मुज़फ़्फ़राबाद पहुँच गए हैं. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में उनका बड़े पैमाने पर स्वागत किया गया है. मुज़फ़्फ़राबाद से बीबीसी संवाददाता मुबश्शिर ज़ैदी का कहना है कि शहर में ट्रैफ़िक पूरी तरह जाम हो गया और हज़ारों लोग उनका स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतर आए. बहुत से लोगों ने हाथों में तरह-तरह की झंडियाँ पकड़ी हुई थीं जिन्हें उत्साह के साथ लहराया गया, सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने कश्मीरी नेताओं पर फूल बरसाए. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की चकोटी सीमा चौकी के ज़रिए प्रवेश करने वाले इन नेताओं के पहुँचने पर शांति के प्रतीक के तौर पर कबूतर भी उड़ाए गए. 1947 में विभाजन के बाद क़रीब छह दशक के इतिहास में यह पहला मौक़ा है कि भारत प्रशासित कश्मीर से कुछ नेता आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का दौरा कर रहे हैं. समाचार एजेंसी एपी ने ख़बर दी है कि वहाँ पहुँचने पर हुर्रियत नेता उमर फ़ारूक़ ने कहा, "हम कश्मीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में दाख़िल हुए हैं. यह भी हमारी अपनी सरज़मीं है." बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के मुताबिक कुल नौ कश्मीरी नेता पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर गए हैं जिनमें हुर्रियत कान्फ्रेंस के सात नेता शामिल हैं. हुर्रियत कान्फ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मीरवाइज़ उमर फ़ारूक ने कहा, "इस दौरे से हमारी कोशिश होगी कि हम कश्मीरी जनता की सही आवाज़ दुनिया तक पहुँचा सकें."
उन्होंने कहा, "कश्मीर की स्थायी शांति के लिए ज़रूरी है कि हम ऐसी नीति अपनाएँ जो सभी पक्षों को स्वीकार्य हो." हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी इस यात्रा में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता यासीन मलिक भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं और डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी का नेतृत्व मोहम्मद अब्दुल्ला तारी कर रहे हैं. अनुमति नहीं इस पार्टी के नेता शब्बीर शाह को भारत सरकार से वीज़ा या यात्रा परमिट नहीं मिल सका क्योंकि उन्होंने वीज़ा के लिए फ़ॉर्म में नागरिकता वाले कॉलम में 'भारतीय' के बजाय 'कश्मीरी' लिख दिया था. ये नेता वहाँ पाकिस्तान सरकार से कश्मीर के मसले पर चर्चा करेंगे. ये नेता उसी रास्ते से मुज़फ़्फ़राबाद जा रहे हैं जिसे दोनों ओर के कश्मीर के लोगों के लिए गत सात अप्रैल को खोला गया था. यह पहला अवसर है जब भारत सरकार ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को कश्मीर मसले पर बात करने के लिए सीमापार जाने की अनुमति दी है. हालाँकि भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगर ये नेता मुज़फ्फ़राबाद से आगे कहीं जाते हैं तो इसकी ज़िम्मेदारी पाकिस्तान सरकार की होगी. इन नेताओं के लिए भी वही परमिट जारी किया गया है जो श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद यात्रा के लिए जारी किया जा रहा है. यानी वे पासपोर्ट और वीज़ा के आधार पर वहाँ नहीं गए हैं. |
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