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भारत के बयान पर शेख़ रशीद को आपत्ति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद ने कश्मीरी नेता यासीन मलिक के एक कथित बयान पर भारत सरकार की तरफ़ से की गई प्रतिक्रिया पर सख़्त आपत्ति की है. शेख रशीद ने बीबीसी से बातचीत में इस बात से साफ़ तौर पर इंकार किया कि वे कभी किसी ट्रेनिंग कैंप से जुड़े थे. भारत ने पाकिस्तान के अख़बार डेली टाइम्स में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ़) के नेता यासीन मलिक के बारे में छपी ख़बर पर गहरी चिंता जताई थी. इस ख़बर में यासीन मलिक के हवाले से कहा गया था कि ''पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख रशीद अहमद ने एक कैंप स्थापित किया था जिसमें लगभग 3500 जेहादियों को प्रशिक्षित किया गया था.'' इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अगर यह ख़बर सही है तो ये बेहद चिंता की बात है कि ऐसे कामों से सीधे जुड़े लोग अब भी पाकिस्तान में ऊंचे पदों पर हैं. हालाँकि यासीन मलिक ने भी इस बात से इंकार किया है कि उन्होंने किसी ट्रेनिंग कैंप की बात की थी. आपत्ति शेख़ रशीद ने भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,"मुझे भारत के बयान से दुःख हुआ और उनके बयान से तो लगता है कि उन्हें हमारे मंत्री बनने पर भी एतराज़ है". उन्होंने कहा कि जब कश्मीर से यासीन मलिक और अन्य लोग आए थे तो वे उनके फार्म पर ख़ाने ही आए थे ना कि ट्रेनिंग लेने. शेख़ रशीद ने कहा कि इस वाकये के बावजूद वे मुज़फ़्फ़राबाद से श्रीनगर जानेवाली बस से श्रीनगर जाएँगे. उन्होंने कहा,"मैं कश्मीर ज़रूर जाऊँगा, ये बस तो चली ही मेरे लिए है, कश्मीरियों के लिए है, अगर इस बस में कश्मीरी ही नहीं गए तो उससे क्या फ़ायदा होगा". इंकार वहीं जेकेएलएफ़ नेता यासीन मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा उसका ग़लत अर्थ लगाया जा रहा है. यासीन मलिक ने कहा,"ट्रेनिंग की कहीं कोई बात नहीं हुई, हम केवल उनके घर में रहे और उन्होंने हमारी भाई की तरह मदद की". मलिक ने कहा कि ये बात 1988-89 की है और तब शेख़ रशीद रावलपिंडी में रहते थे जहाँ वे उनके घर रहते थे. |
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