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'कश्मीर पर यथास्थिति स्वीकार नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के दौरे पर गए हुर्रियत नेताओं ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर पर यथास्थिति उन्हें स्वीकार नहीं है और यही पाकिस्तान की भी राय है. मंगलवार को हुर्रियत नेताओं ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मुलाक़ात की. मुलाक़ात पाँच घंटे तक चली. मुलाक़ात के बाद बीबीसी उर्दू से विशेष बातचीत में हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा कि दोनों पक्षों की यही राय थी कि जम्मू-कश्मीर पर यथास्थिति उन्हें स्वीकार नहीं है और न ही उन्हें नियंत्रण रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना उन्हें स्वीकार है. मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ के अनुसार बातचीत के दौरान इस पर भी सहमति थी कि कश्मीर मसले का ऐसा समाधान होना चाहिए जो भारत, पाकिस्तान और कश्मीरियों को मंज़ूर हो. उन्होंने कहा कि अगर ये तीनों पक्ष एकमत नहीं होंगे, तो समाधान मुश्किल होगा. हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने एक बार फिर पाकिस्तान से साथ चल रही शांति वार्ता में कश्मीरियों को शामिल करने की बात दोहराई. उन्होंने कहा कि अब यह भारत पर निर्भर है कि वह इस संबंध में क्या क़दम उठाता है. दबाव समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने हुर्रियत नेताओं से कहा है कि वे बातचीत में कश्मीरियों को शामिल करने के लिए भारत पर दबाव नहीं डाल सकते. लेकिन उन्होंने भी यह स्वीकार किया कि समाधान तभी स्थायी होगा जब वह भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ कश्मीरियों को भी स्वीकार हो. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीरी नेताओं से कहा कि पाकिस्तान उन्हें समर्थन देना जारी रखेगा. हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने भी कहा कि उन्हें राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर पूरा भरोसा है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से मुलाक़ात के पहले हुर्रियत नेताओं ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी से मुलाक़ात की. इस बैठक के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया. इस बयान के मुताबिक़ कसूरी ने कहा कि कश्मीर मसले का समाधान उसी समय पाकिस्तान को स्वीकार हो सकता है जब कश्मीरी भी इसे स्वीकार करें. |
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