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कश्मीरी नेताओं की ऐतिहासिक यात्रा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीरी अलगाववादी संगठन सर्वदलीय हुर्रियत कांफ़्रेंस और कुछ अन्य कश्मीरी संगठनों के नेता आज पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात करने वाले हैं. भारत प्रशासित कश्मीर से अनेक नेता गुरूवार को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ्फराबाद पहुँचे थे. मुज़फ़्फ़राबाद में उनका भव्य स्वागत किया गया है और अब वो प्रधानमंत्री सिकंदर हयात से मिलेंगे. इन अलगाववादी नेताओं की मुलाक़ात कई अन्य स्थानीय नेताओं से भी होनी है और वो वहाँ की असेंबली देखने भी जाएंगे. एक दो दिन बाद इन नेताओं का इस्लामाबाद जाने का भी कार्यक्रम है जहाँ उनकी मुलाक़ात पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ से होने की संभावना है. ख़बर है कि ये नेता प्रधानमंत्री शौकत अजीज़ से भी मिलेंगे और पाकिस्तान के अन्य राजनीतिक दलों के मुख्य नेताओं से भी इनकी मुलाक़ात होगी. इस्लामाबाद के बाद इन नेताओं की योजना लाहौर और कराची जाने की भी है. हालाँकि इन नेताओं की इस्लामाबाद यात्रा को लेकर अभी अटकलें लगाई जा रही हैं. बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि भारत और पाकिस्तान की सरकारें इस बारे में खुलकर कुछ कहना नहीं चाह रही हैं. हालाँकि भारत ने पहले कहा था कि अगर ये नेता पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के अलावा कहीं और जाते हैं तो इसकी ज़िम्मेदारी पाकिस्तान की होगी. ज़फ़र अब्बास का कहना है कि अगर हुर्रियत नेता इस्लामाबाद जाते हैं तो भी भारत-पाक संबंधों पर इसका कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा. उधर पाकिस्तान के अख़बारों में इस यात्रा को काफ़ी तरजीह दी जा रही है और क़रीब सभी अख़बारों के मुखपृष्ठों पर इन नेताओं की तस्वीरें छपी हैं. दूसरी तरफ़ भारतीय अख़बारों में इसे उतनी जगह नहीं मिल पाई है. एक दो अख़बारों को छोड़कर किसी अन्य अख़बार में यह पहली कहानी नहीं है. मुज़फ़्फ़राबाद में स्वागत मुज़फ़्फ़राबाद से बीबीसी संवाददाता मुबश्शिर ज़ैदी का कहना है कि शहर में यातायात पूरी तरह जाम हो गया और हज़ारों लोग उनका स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतर आए. बहुत से लोगों ने हाथों में तरह-तरह की झंडियाँ पकड़ी हुई थीं जिन्हें उत्साह के साथ लहराया गया, सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने कश्मीरी नेताओं पर फूल बरसाए. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की चकोती सीमा चौकी के ज़रिए प्रवेश करने वाले इन नेताओं के पहुँचने पर शांति के प्रतीक के तौर पर कबूतर भी उड़ाए गए. 1947 में विभाजन के बाद क़रीब छह दशक के इतिहास में यह पहला मौक़ा है कि भारत प्रशासित कश्मीर से कुछ नेता आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का दौरा कर रहे हैं. |
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