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भरोसे में नहीं लिया गया: हुर्रियत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की यात्रा पर गए हुर्रियत नेताओं ने शांति प्रक्रिया में कश्मीरी नेताओं को शामिल न करने पर भारत और पाकिस्तान की आलोचना की है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में विधानसभा को संबोधित करते हुए हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा कि वे इस विचार से सहमत नहीं कि मौजूदा शांति प्रक्रिया से पीछे नहीं हटा जा सकता. उमर फ़ारूक़ ने कहा, "शांति प्रक्रिया पर कश्मीरियों से कोई राय नहीं ली गई. अगर इस प्रक्रिया में कश्मीरियों को शामिल न किया गया तो यह नयी पहल भी नाकाम हो जाएगी." उमर फ़ारूक़ ने कहा कि हुर्रियत नेताओं का प्रतिनिधिमंडल अपने साथ कुछ प्रस्ताव लेकर आया है और वे इस पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के नेताओं और पाकिस्तानी सरकार के साथ भी विचार-विमर्श करेंगे. एक अन्य कश्मीरी नेता यासीन मलिक ने कहा कि कश्मीरियों ने हमेशा शांति और लचीले रुख़ का समर्थन किया है. शांति प्रक्रिया उन्होंने कहा कि इसके बावजूद मौजूदा शांति प्रक्रिया में कश्मीरियों को भरोसे में नहीं लिया गया. यासीन मलिक ने कहा कि इतनी बड़ी शांति प्रक्रिया चल रही है और कश्मीरियों को इसके बारे में जानकारी मिलती है रेडियो या टेलीविज़न से. उन्होंने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के नेताओं की भी आलोचना की और कहा कि वे सिर्फ़ नारेबाज़ी करते हैं. मलिक ने कहा कि इन नेताओं को आगे आकर कश्मीरियों के अधिकार के लिए संघर्ष करना चाहिए. शनिवार को हुर्रियत के नेता इस्लामाबाद जा रहे हैं. उम्मीद है कि वे रविवार या सोमवार को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ से मिलेंगे. भारत प्रशासित कश्मीर से अनेक नेता गुरूवार को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ्फराबाद पहुँचे थे. 1947 में विभाजन के बाद क़रीब छह दशक के इतिहास में यह पहला मौक़ा है कि भारत प्रशासित कश्मीर से कुछ नेता आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का दौरा कर रहे हैं. |
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