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गुरुवार, 16 जून, 2005 को 18:48 GMT तक के समाचार
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'आईएसआई ने हथियार और ट्रेनिंग दी थी'
अमानुल्ला ख़ान
अमानुल्ला ख़ान ने अपनी किताब में सनसनीखेज़ विवरण दिए हैं
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के एक वरिष्ठ अलगाववादी नेता ने आरोप लगाया है कि कश्मीरी चरमपंथियों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने 1980 के दशक में ट्रेनिंग दी थी.

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ़) के नेता अमानुल्ला ख़ान का कहना है कि चरमपंथियों को प्रशिक्षण देने के फ़ैसले को तत्कालीन राष्ट्रपति ज़िया उल हक़ का समर्थन हासिल था.

पाकिस्तान की सरकार पर किसी कश्मीरी नेता की ओर से पहली बार ऐसे आरोप लगाए गए हैं, पाकिस्तान सरकार की भूमिका पर इतनी कड़ी टिप्पणी किसी कश्मीरी नेता ने पहले नहीं की है.

अमानुल्ला ख़ान ने ये आरोप अपनी किताब 'कॉन्टीन्यूअस स्ट्रगल' के ताज़ा संस्करण में लगाए हैं, इस किताब का पहला संस्करण 1992 में छपा था.

भारत लगातार पाकिस्तान पर चरमपंथियों को प्रशिक्षण देने का आरोप लगाता रहा है और पाकिस्तान इसका खंडन करता रहा है, ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जबकि दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिशें चल रही हैं.

जेकेएलएफ़ पहला कश्मीरी संगठन था जिसने 1988 में भारतीय प्रशासन के ख़िलाफ़ हथियार उठाए थे.

भूमिका

अमानुल्ला ख़ान का कहना है कि आईएसआई ने 1987 में जेकेएलएफ़ से पहली बार फ़ारूक़ हैदर के ज़रिए संपर्क किया था. इसके बाद जेकेएलएफ़ और आईएसआई में एक समझौता हुआ था जिसके तहत कश्मीरी नौजवानों को प्रशिक्षण और हथियार देने की बात तय हुई थी.

अमानुल्ला ख़ान का कहना है कि वे इस समझौते में शामिल नहीं थे लेकिन उन्हें समझाया गया कि ज़िया उल हक़ और जेकेएलएफ़ के विचार कश्मीर के बारे में बिल्कुल एक जैसे हैं.

अमानुल्ला ख़ान का कहना है कि आईएसआई की मदद इसलिए भी ली गई क्योंकि अपने बल पर विद्रोह खड़ा करने की दो कोशिशें पहले नाकाम रही थीं.

ख़ान का कहना है कि जेकेएलएफ़ से आईएसआई के तत्कालीन प्रमुख जनरल अख़्तर अब्दुर्रहमान ने वादा किया था कि जेकेएलएफ़ के अंदरूनी और विचारधारा के मामलों में कोई दख़लंदाज़ी नहीं होगी.

अमानुल्ला ख़ान का कहना है कि आईएसआई ने जेकेएलएफ़ के नेताओं को नक़द सहायता देने पर भी रज़ामंदी की थी और यह सब कुछ जनरल ज़िया की मर्ज़ी से हो रहा था.

किताब में लिखा गया है कि जेकेएलएफ़ और आईएसआई के रास्ते 1990 में अलग-अलग हो गए जब आईएसआई ने माँग की कि जेकेएलएफ़ की बैठकों में उनके लोगों को शामिल होने दिया जाए.

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