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हुर्रियत नेताओं की यात्रा से भाजपा नाराज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीर मसले पर पिछले कुछ समय से सरकार का समर्थन कर रही भारतीय जनता पार्टी ने अब हुर्रियत नेताओं की पाकिस्तान यात्रा पर चिंता जताई है. बीजेपी का कहना है कि हुर्रियत नेताओं को पाक अधिकृत कश्मीर की यात्रा के लिए परमिट मिला था. पाकिस्तान को चाहिए था कि बिना भारतीय पासपोर्ट के इन हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान में न घुसने दें. बीजेपी प्रवक्ता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि इस घटना के बाद पार्टी की चिंता बढ़ गई है. पार्टी को पहले से ही आशंका थी कि श्रीनगर और मुज़्ज़फ़राबाद के बीच बस सेवा शुरू होने से अलगाववादी ताक़तों को बग़ैर पासपोर्ट पाकिस्तान जाने में आसानी होगी. उन्होंने कहा कि इस बारे में उनकी पार्टी संसद में सवाल उठाएगी. असली वारिस उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के इस बयान को भी सिरे से ख़ारिज किया जिसमें मुशर्रफ़ ने कहा था कि हुर्रियत कांफ़्रेंस के नेता जम्मू-कश्मीर की जनता के प्रतिनिधि हैं. मल्होत्रा ने कहा, "हुर्रियत के पास जम्मू और लद्दाख से कोई समर्थन नहीं है. यहाँ तक कि कश्मीर घाटी में भी हुर्रियत के लोगों ने कभी भी चुनाव नहीं लड़ा और उनका चरित्र प्रतिनिधित्व करनेवाला नहीं है." उन्होंने पाकिस्तान द्वारा हुर्रियत नेताओं के समर्थन को बेहद आपत्तिजनक बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह क़दम 6 जनवरी 2004 के पाकिस्तानी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संयुक्त घोषणा पत्र का उल्लंघन है. उन्होंने केंद्र की वर्तमान यूपीए सरकार को इस बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए भी कहा है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने इससे पहले जम्मू-कश्मीर के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपने यहाँ नहीं आने दिया था. भाजपा अब इस मुद्दे पर अगले संसदीय सत्र में ज़ोर-शोर से सवाल उठाने का मन बना रही है और सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण मांग रही है. |
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