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हुर्रियत नेताओं को बातचीत का न्यौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी गुट हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के उदारवादी धड़े को पांच सितंबर को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. बीबीसी के श्रीनगर ब्यूरो के अनुसार मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ के नेतृत्ववाले हुर्रियत के उदारवादी गुट ने प्रधानमंत्री के इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हुर्रियत के चेयरमैन और अन्य नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में घोषणा की थी कि जो गुट हिंसा छोड़ने को तैयार हैं, वो उनके साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. इसके पहले हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के उदारवादी धड़े ने कहा था कि वह भारत सरकार के साथ बातचीत शुरू करना चाहता है. दोनों पक्षों के बीच बातचीत पिछले एक वर्ष से रूकी हुई है. उदारवादी गुट के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा था कि अनौपचारिक तौर पर वे भारत सरकार के प्रतिनिधियों के संपर्क में हैं और उन्होंने उनसे अपनी इच्छा जता दी है. नरम रुख़ इसके पहले भारत सरकार ने हुर्रियत नेताओं को श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस से यात्रा करने की अनुमति प्रदान कर दी थी.
लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति प्रक्रिया को लेकर मनमोहन सरकार की नीतियों पर गंभीर आपत्ति जताई थी और कहा था कि हुर्रियत नेताओं की यात्रा से ठीक ढंग से नहीं निपटा गया. इस संबंध में वाजपेयी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र भी लिखा था जिसमें कहा गया है कि हुर्रियत को जम्मू कश्मीर की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के मुक़ाबले अधिक प्रमुखता दी जा रही है. इसके जवाब में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि सरकार ने हुर्रियत नेताओं की पाकिस्तान यात्रा से निपटने में कोई कोताही नहीं बरती. मनमोहन सिंह ने कहा था कि हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से बाहर निकलकर दूसरे हिस्सों में जाने की अनुमति देना पाकिस्तान का निर्णय था. |
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