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सोमवार, 05 सितंबर, 2005 को 17:29 GMT तक के समाचार
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सैनिकों की संख्या में कटौती संभव
मनमोहन सिंह
हुर्रियत नेताओं के साथ बातचीत 17 महीने के बाद हो रही है
भारतीय प्रधानमंत्री ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाक़ात के बाद कहा है कि अगर सीमा पार से घुसपैठ और हिंसा में कमी आई तो केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर में तैनात सैनिकों की संख्या में कटौती कर सकती है.

एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा की गई है कि सरकार आतंकवाद निरोधक क़ानून (पोटा) और नागरिक सुरक्षा क़ानून के तहत गिरफ़्तार किए गए कश्मीरी लोगों के मामलों की समीक्षा करेगी.

प्रधानमंत्री ने अलगाववादी नेताओं को आश्वासन दिया कि सरकार जम्मू कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगी और इसके लिए वह हरसंभव क़दम उठाने को तैयार है.

उधर हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने कहा है उन्हें भारत सरकार के रुख़ में, तरीके में बदलाव और लचक नज़र आई है.

 सरकार जम्मू कश्मीर की जनता के वास्ते शांति, आत्मसम्मान और गरिमापूर्ण जीवन की स्थितियाँ तैयार करने के लिए वचनबद्ध है
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी कि बातचीत जारी रखी जाए ताकि समस्या से जुड़े सभी क्षेत्रों और हर तरह की राजनीतिक विचारधारा के लोगों को इसमें शामिल किया जा सके.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ के नेतृत्व वाले एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात के बाद कहा कि "लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है."

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के इस प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की शुरूआत का प्रधानमंत्री ने स्वागत किया और कहा कि बातचीत की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि "सरकार जम्मू कश्मीर की जनता के वास्ते शांति, आत्मसम्मान और गरिमापूर्ण जीवन की स्थितियाँ तैयार करने के लिए वचनबद्ध है."

हुर्रियत

 समस्या का स्थायी और सम्माजनक समाधान बातचीत के ज़रिए निकालने की कोशिश की जानी चाहिए
मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़
अलगाववादी गुटों के संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात और कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का स्वागत किया है, उन्होंने कहा है कि वे अगली बैठक में समस्या के हल के बारे में कुछ सुझाव पेश करेंगे.

मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ का कहना था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माना कि कश्मीर का मुद्दा कोई सैनिक मुद्दा नहीं है और ये ताकत के बल पर हल नहीं किया जा सकता.

उनका कहना था कि कश्मीर की समस्या ऐसी नहीं है कि एक ही बैठक में हल हो जाए.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पहले भारत और पाकिस्तान के बीच ही बातचीत हो रही थी और अब कश्मीरी भी भारत सरकार से बात कर रहे हैं.

मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ का कहना था कि ये 'त्रिकोणीय' बातचीत आगे बढ़ रही है और वे राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से 17 सितंबर को अमरीका में मिलेंगे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अमरीका दौरे के बाद फिर उनसे मिलेंगे.

कश्मीरी नेताओं ने कहा है कि समस्या के पूर्ण समाधान के लिए बातचीत की प्रक्रिया का जारी रखा जाना आवश्यक है.

उन्होंने कहा, "समस्या का स्थायी और सम्मानजनक समाधान बातचीत के ज़रिए निकालने की कोशिश की जानी चाहिए."

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री और हुर्रियत नेताओं ने माना कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है कि हर तरह की हिंसा का अंत हो.

हुर्रिरय कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल ने भारत और पाकिस्तान के बीच जारी शांति प्रक्रिया की प्रशंसा की और श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा की शुरूआत का स्वागत किया.

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