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गुरुवार, 09 फ़रवरी, 2006 को 13:25 GMT तक के समाचार
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नेपाल में सामान्य होता जनजीवन
काठमांडू में प्रदर्शन
बुधवार को एक प्रदर्शनकारी की हत्या के विरोध में काठमांडू में एक हज़ार लोगों ने प्रदर्शन किया
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों की चार दिन की हड़ताल के बाद अब जन-जीवन सामान्य हो रहा है.

मगर राजधानी काठमांडू में सुबह थोड़ा तनाव रहा जब लगभग 1,000 छात्रों ने बुधवार को एक प्रदर्शनकारी के मारे जाने का विरोध किया.

प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस का प्रयोग किया.

नेपाल के दांग ज़िले में बुधवार को चुनाव का विरोध कर रहे लोगों पर सेना के गोली चलाने से उमेश चंद्र थापा नाम के राजनीतिक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी.

इस बीच नेपाल में चुनावों के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार ने कहा है कि नेपाले में किसी भी चुनाव को तभी विश्वसनीय माना जाएगा जब उसमें सभी राजनीतिक पार्टियों की भागीदारी होगी.

जन-जीवन सामान्य

 सच्चाई ये है कि ये चुनाव तब हुए जब अधिकतर राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव का बहिष्कार किया हुआ था, राजनेताओं के अधिकारों का हनन हुआ था और कई राजनेताओं को हिरासत में लिया जाता रहा
भारत सरकार का विदेश मंत्रालय

माओवादियों की चार दिन की हड़ताल की वापसी के बाद गुरूवार को नेपाल में आम-जीवन फिर से पटरी पर लौटने लगा.

माओवादियों ने बुधवार को स्थानीय निकायों के चुनाव को प्रभावित करने के लिए सप्ताह भर की आम हड़ताल का आह्वान किया था लेकिन चार दिन बाद ये कहते हुए हड़ताल वापस ले ली कि उनका चुनाव बाधित करने का उद्देश्य पूरा हो गया.

नेपाल के अधिकारियों के अनुसार 20 प्रतिशत वोटरों ने मतदान में हिस्सा लिया जो 1997 में हुए चुनाव में शामिल होनेवाले मतदाताओं की संख्या के एक-तिहाई से भी कम है.

नेपाल के 58 शहरों मे से केवल 36 में ही चुनाव कराए जा सके क्योंकि बाक़ी सीटों पर या तो कोई प्रत्याशी ही नहीं खड़ा हुआ या वहाँ केवल एक ही उम्मीदवार था.

काठमांडू स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि माओवादियों पर विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की तरफ़ से हड़ताल वापस लेने के लिए दबाव था क्योंकि इनसे आम लोगों को काफ़ी परेशानी हो रही थी.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने नेपाल चुनाव के बारे में एक बयान जारी कर लिखा है कि चुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियों की भागीदारी से ही नेपाल में लोकतंत्र बहाल हो सकेगा और राजनीतिक स्थिरता क़ायम हो सकेगी.

बयान में लिखा है,"सच्चाई ये है कि ये चुनाव तब हुए जब अधिकतर राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव का बहिष्कार किया हुआ था, राजनेताओं के अधिकारों का हनन हुआ था और कई राजनेताओं को हिरासत में लिया जाता रहा".

बयान में माओवादी हिंसा पर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि नेपाल में जो चुनौतियाँ हैं उनका सामना करने के लिए राजनीतिक सहमति, बातचीत और लोगों की भागीदारी की आवश्यकता है जिससे एक शांतिपूर्ण राजनीतिक हल निकल सकेगा.

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