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'ईरान पर मसौदा देखकर रुख़ तय करेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि ईरान के मसले को वह वार्ताओं के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मंच पर ही नपटाने के हक़ में हैं. हालांकि उन्होंने ईरान के मसले पर अमरीकी राजदूत के बयान पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, पर ईरान पर भारत के रुख़ को रखते हुए उन्होंने कहा, "जब तक कोई मसौदा सामने नहीं आता है तब तक कुछ कह पाना जल्दबाज़ी होगी. मसौदे को देखने के बाद ही भारत अपना अंतिम निर्णय लेगा." उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी पर ईरान मामले को सुरक्षा परिषद में भेजने का दबाव बढ़ता जा रहा है. गुरूवार को एजेंसी की वियना में आयोजित बैठक में इस पर मतदान होने की संभावना है. मनमोहन सिंह बुधवार को दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे. सरकार की विदेश नीति के बारे में पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा, "हम पूरी ईमानदारी के साथ कह सकते हैं कि हम एक ऐसी विदेश नीति पर काम कर रहे हैं, जिसका मकसद देश के जागरूक राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देना है." प्रधानमंत्री ने कहा, "हम किसी भी तरह के दबाव में नहीं है. दुनिया के तमाम देशों से हमारे संबंध सुधरे हैं. संबंधों का दायरा बढ़ा है." सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी की स्थिति के बारे में पूछे गए सवाल पर वह बोले, "हो सकता है कि भारत को सदस्यता देने में फिलहाल कुछ दिक्कतें हों पर भारत ने मज़बूती के साथ अपने दावेदारी पेश की है और सभी को इस बात का अनुमान है कि भारत की दावेदारी किसी भी तरह से कमज़ोर नहीं है." गठबंधन धर्म प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही यूपीए के घटक दलों के बीच कुछ विषयों पर मतभेद सामने आते रहे हों पर सरकार अंतिम फ़ैसला अपनी सहमतियों के आधार पर ही लेती है. उन्होंने कहा, "हमें इस बात का कोई संकट नहीं है कि हमारी सरकार गिरने वाली है. हमारी सरकार पूरे पाँच साल चलेगी और ज़रूर चलेगी." उन्होंने कहा कि भारत कश्मीर मसले के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने में लगा है. दोनों ओर से लोगों के बीच संवाद और आन-जाना बढ़ा है. बसें चली हैं और हालात सुधरे हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद से यह दूसरी बार है जबकि मनमोहन सिंह ने पत्रकारों को अलग से संबोधित किया है. उन्होंने तमाम विषय़ों पर प्रश्नों के जवाब दिए. यह पत्रकार वार्ता ऐसे समय में की गई है, जबकि केंद्र की यूपीए सरकार अपने कार्यकाल के 20 महीने पूरे कर चुकी है. प्रधानमंत्री ने देश के कुछ हिस्सों में किसानों की आत्महत्या की बात को स्वीकारते हुए कहा कि इस दिशा में प्रायोगिक पहलू पर ग़ौर करने की ज़रूरत है. उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने कृषि क्षेत्र में कर्ज़ को 30 प्रतिशत तक बढ़ाया है और सरकार ने तय किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही सहकारी समितियों को सशक्त करने के लिए इस क्षेत्र में 13 हज़ार करोड़ की राशि लगाई जाएगी. इससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा. सोनिया का साथ प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के 20 माह के कार्यकाल में रोज़गार गारंटी कानून और सूचना का अधिकार कानून को सबसे बड़ी उपलब्धियों के तौर पर गिनाया. यह पूछे जाने पर कि किसका कद बड़ा है, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी का या फिर उनका, प्रधानमंत्री ने कहा, "प्रश्न क़द का नहीं है. किसी भी तरह की तुलना करने के बजाय इस तरह देखना चाहिए कि उनके कारण कई कामों को बढ़ावा दिया जा सका है जो शायद केवल मेरे रहते उस तरह नहीं हो पाते." उन्होंने कहा, "मेरे लिए तमाम कामों को अकेले उतना समय दे पाना संभव नहीं था जितना कि सोनिया गांधी के कारण मिला है और इससे काफ़ी सकारात्मक उपलब्धियां रही हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें मनमोहन मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार29 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस संकटों से जूझती काँग्रेस का अधिवेशन20 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'वोट के अधिकार पर फ़ैसला जल्द'07 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'सेक्स पर चर्चा की झिझक दूर हो'01 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान और क़दम उठाए: मनमोहन13 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मामले की तह तक जाएँगे: प्रधानमंत्री 08 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'चरमपंथ के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो'31 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'विधानसभा भंग करने की ज़िम्मेदारी मेरी'08 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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