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संकटों से जूझती काँग्रेस का अधिवेशन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र में सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस पार्टी का पहला महाधिवेशन हैदराबाद में शनिवार को शुरु हो रहा है. क्वात्रोकी मामले और कर्नाटक सरकार पर छाए गंभीर संकट की छाया में यह सम्मेलन होगा. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित देश भर से आए पार्टी के दस हज़ार प्रतिनिधि कड़ी सुरक्षा के बीच 'राजीव गाँधी नगर' में अखिल भारतीय काँग्रेस कमेटी के 82वें अधिवेशन में पार्टी की स्थिति पर चर्चा करेंगे. इस तीन दिवसीय अधिवेशन की शुरुआत शनिवार को पार्टी कार्यसमिति की बैठक से होगी. पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा है और आयोजन समिति की ओर से जारी किए गए अधिकृत पास दिखाने पर ही आयोजन स्थल के चार किलोमीटर के दायरे में प्रवेश संभव है. 'बाइबिल' लगभग एक दशक पहले तक गठबंधन सरकारों को अस्थाई बताने वाली काँग्रेस अब खुद केंद्र में पहली बार गठबंधन सरकार चला रही है और इस राजनैतिक असलियत को समझते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता अब गठबंधन चलाने के लिए न्यूनतम कार्यक्रम को 'बाइबिल' की संज्ञा दे रहे हैं.
पार्टी नेत्तृत्व इस बात को अच्छी तरह से समझ चुका है कि एक दर्जन दलों को साथ लेकर बनाए गए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को चलाने के लिए काँग्रेस को सबकी बात सुननी पड़ेगी. महत्वपूर्ण है कि कांग्रेस शायद ये भी समझ चुकी है कि स्वाधीनता के बाद से कांग्रेस के मुखर आलोचक रहे वामपंथी दल जिनका समर्थन इस सरकार के लिए 'आक्सीजन' है, उन्हें महत्त्व देना आवश्यक है. काँग्रेस महासचिव अंबिका सोनी का कहना है कि पार्टी को गठबंधन चलाने में कोई परेशानी नहीं है. उनका कहना है, "हमारी पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री दोनों स्पष्ट कर चुके हैं कि केंद्र सरकार साझा न्यूनतम कार्यक्रम के आधार पर काम करती रहेगी. हम कई राज्यों में भी गठबंधन सरकारें चला रहे हैं, कई बार मतभेंदों का उभरना स्वाभाविक है, लेकिन इसमें कोई बड़ी परेशानी की बात नहीं है." इस अधिवेशन में सरकार और संगठन के बीच समन्वय बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार होगा. छवि पर ध्यान पार्टी का इस ओर भी ध्यान होगा कि इस धारणा पर विराम लगाया जाए कि यूपीए सरकार ने ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्यक्रम जैसे बड़े कदम उठाने के फ़ैसले वाम दलों के दबाव में लिए है. बल्कि पार्टी इस ओर ध्यान देगी कि कांग्रेस इन फ़ैसलों का श्रेय ख़ुद ले सके.
पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस का शीर्ष नेत्तृत्व ग्रामीण क्षेत्रों और ग़रीब जनता पर ध्यान केंद्रित कर, हिंदी भाषी क्षेत्र के बड़े राज्यों में खोए हुए जनाधार को वापस पाने के लिए, प्रयास तेज़ करने के पक्ष में है. दूसरी तरफ़ महाधिवेशन शुरु होने से पहले ही सोनिया गाँधी के पुत्र और अमेठी से पार्टी सांसद राहुल गाँधी को काँग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था - पार्टी कार्यसमिति में शामिल किए जाने की माँग भी ज़ोर पकड़ रही है. पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने इस बारे में कहा, "राहुल गाँधी न केवल पार्टी के सांसद और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं, वो देश के युवा वर्ग के प्रतीक भी हैं. हमारी सब की भावना है कि वो कार्यसमिति के सदस्य हों और ये माँग उठना स्वाभाविक है." लेकिन राहुल गाँधी की बहन प्रियंका गाँधी काँग्रेस के हैदराबाद अधिवेशन में शामिल नहीं होंगी. प्रियंका ने आयोजन समिति की ओर से भेजे गए निमंत्रण का जवाब देते हुए, इस समारोह में शामिल होने में असमर्थतता व्यक्त की है. | इससे जुड़ी ख़बरें सरकार-सीबीआई को यथास्थिति के निर्देश16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सपा और कांग्रेस के तल्ख़ होते रिश्ते12 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नटवर सिंह का इस्तीफ़ा मंज़ूर07 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'बिहार के साथ भेदभाव नहीं होने देंगे'11 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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