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'विधानसभा भंग करने की ज़िम्मेदारी मेरी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार का मुखिया होने के नाते वो बिहार विधानसभा को भंग करने के फ़ैसले की ज़िम्मेदारी लेते हैं. मनमोहन सिंह चंडीगढ़ में कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के आख़िरी दिन पत्रकारों से बात कर रहे थे. मनमोहन सिंह ने कहा कि बिहार के राज्यपाल ने उन्हें राज्य की विशेष परिस्थितियों से अवगत करवाया था. उनका कहना था, “सब बातों पर ग़ौर करने के बाद मुझे और कैबिनेट के सदस्यों को लगा कि उस वक़्त विधानसभा को भंग करना ही एकमात्र व्यवहारिक तरीक़ा था.” प्रधानमंत्री ने कहा कि वो कोर्ट के फ़ैसले की प्रति देखना चाहेंगे ताकि वो समझ सकें कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फ़ैसला क्यों दिया. ग़ौरतलब है कि 21 मई को राज्यपाल बूटा सिंह ने केंद्र सरकार को बिहार विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश की थी. इसके बाद 23 मई को केंद्र सरकार ने इसे भंग कर दिया था. राजनीति और राज्यपाल जब प्रधानमंत्री से पूछा गया कि क्या उनकी सरकार राजनेताओं को राज्यपाल नियुक्त करने की नीति पर फिर से सोचेगी तो उनका कहना था, “ये ज़रूरी नहीं कि राजनीति में सक्रिय होने से किसी नेता के अच्छा राज्यपाल बनने की योग्यता पर असर पड़ता है.” इससे पहले सम्मेलन में बोलते हुए मनमोहन सिंह ने कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य समेत सभी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को अच्छी तरह लागू करें. उन्होंने मुख्यमंत्रियों को आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर भी सजग रहने के लिए कहा. प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर क़ानून व्यवस्था ठीक नहीं होगी तो आर्थिक विकास का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. चंडीगढ़ में जिस वक़्त बैठक हो रही थी तो वहाँ भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसके चलते बैठक को बीच ही में रोकना पड़ा और इमारत को खाली करवा लिया गया.इमारत की जाँच होने के बाद ही बैठक फिर से शुरू हो पाई. |
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