| विपक्ष ने प्रधानमंत्री से इस्तीफ़ा माँगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट के बिहार विधानसभा भंग करने को अंसवैधानिक क़रार दिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. एनडीए के बिहार के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार औऱ जनता दल-यू नेता नीतिश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफ़े की माँग की है. नीतिश कुमार का कहना है कि नैतिकता के आधार प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. साथ ही नीतिश कुमार ने राज्यपाल बूटा सिंह को वापस बुलाए जाने की माँग की है. भाजपा नेता अरुण जेटली ने अदालत के फ़ैसले के मद्देनज़र केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आत्मावलोकन करना चाहिए. जेटली ने कहा कि मंत्रिमंडल की आधी रात को बैठक बुलाई ताकि नीतिश कुमार अगले दिन सरकार न बना सकें. उनका कहना था कि सरकार के इस निर्णय में राज्यपाल के साथ-साथ लालू यादव की भी भूमिका थी. लालू ने स्वागत किया दूसरी ओर आरजेडी नेता लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है. उनका कहना था कि यह उनकी जीत है क्योंकि चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो रहे हैं. लेकिन उन्होंने राज्यपाल की भूमिका पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि फ़ैसले के बारे में अटकलें लगाना उचित नहीं है. उनका कहना था कि एक ओर तो अदालत ने विधानसभा भंग करने को असंवैधानिक क़रार दिया है तो दूसरी चुनाव प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है. उनका कहना था कि यह बात ज़रूर है कि केंद्र सरकार अदालत में अपनी बात पूरी तरह से रखने में सफल नहीं रही है. लोकजनशाक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि उनकी पार्टी चुनाव प्रचार में पहले से ही जोर शोर से लगी है. |
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