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'बिहार विधानसभा भंग करना असंवैधानिक' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट बिहार विधानसभा भंग करने के निर्णय को असंवैधानिक क़रार दिया है पर साथ ही कहा कि चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है और इसलिए इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि वर्तमान हालात में विधानसभा चुनाव ज़रूरी हैं और इसे रद्द नहीं किया जा रहा. जनता दल-यू नेता नीतिश कुमार ने बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह को तत्काल बर्ख़ास्त करने और नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफ़ा देने की माँग की है. भाजपा नेता अरुण जेटली ने फ़ैसले का स्वागत किया है और राज्यपाल को हटाए जाने की माँग की है. एनडीए नेताओं ने घोषणा की है कि राज्यपाल बूटा सिंह को वापस बुलाने की माँग को लेकर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में वे राष्ट्रपति कलाम से सोमवार को मिलेंगे. भंग करने का फ़ैसला ग़ौरतलब है कि 21 मई को राज्यपाल बूटा सिंह ने केंद्र सरकार को बिहार विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश की थी. इसके बाद 23 मई को केंद्र सरकार ने इसे भंग कर दिया था. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा भंग करने के मामले को पाँच सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया था. न्यायमूर्ति वाईके सबरवाल की अध्यक्षता वाले पीठ ने छह दिन की सुनवाई के बाद कहा था कि 18 अक्तूबर के पहले एक छोटा आदेश सुनाया जाएगा. बिहार के एक पूर्व विधायक की याचिका पर ये सुनवाई हुई थी. इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्यपाल ने दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट भेजी जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने वहाँ विधानसभा को भंग करने का निर्णय लिया था. राज्यपाल ने 21 मई को कथित रूप से विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी. अगले दिन रात में कैबिनेट की बैठक हुई और उसकी सिफारिश मॉस्को में राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के पास भेजी. इसके बाद 23 मई को विधानसभा को भंग करने की घोषणा कर दी गई. सरकार के इस फ़ैसले का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था. लेकिन इसके बाद चुनाव आयोग ने बिहार में नई विधानसभा के गठन के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी और वहाँ पहले चरण का चुनाव प्रचार ज़ोरों पर है. |
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