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'सेक्स पर चर्चा की झिझक दूर हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि समाज को सुरक्षित यौन संबंधों पर सार्वजनिक चर्चा को लेकर अपनी पारंपरिक झिझक ख़त्म करनी चाहिए. उन्होंने कहा है कि चूंकि आने वाले दिनों में एड्स का देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर होने वाला है इसलिए इसे लेकर समाज में जागरुकता पैदा करनी चाहिए. एड्स पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एड्स को स्वास्थ्य मंत्रालय से निकालकर सभी सरकारी विभागों के दायरे में लाना होगा. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किए गए वायदों को पूरा करने के लिए एड्स नियंत्रण को शीघ्र ही राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का हिस्सा बनाया जाएगा. मनमोहन सिंह का कहना था कि इससे एड्स के फ़ैलाव को तेज़ी से रोका जा सकेगा. युवाओं में संक्रमण की आशंका ज़्यादा होने की बात पर उन्होंने कहा, "क्या होगा यदि हम इस बीमारी की वजह से अपने युवाओं को गँवाने लगें. इसका असर हमारे समाज, अर्थव्यवस्था और निश्चित रुप से भविष्य पर पड़ेगा." उन्होंने युवा नेताओं से कहा कि वे युवक-युवतियों के बीच जागरुकता फैलाने का प्रयास करें. उनका कहना था कि परिवार में और सहयोगियों के बीच सुरक्षित यौन संबंधों पर चर्चा की झिझक को दूर करना चाहिए. एड्स से निपटने के लिए उन्होंने स्वयंसेवी संगठनों, नागरिकों, समाज और निजी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सरकार की सहायता करें. | इससे जुड़ी ख़बरें विश्व एड्स दिवस पर संयुक्त राष्ट्र की अपील01 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना स्वाज़ीलैंड में वयस्क एड्स की चपेट में01 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना गाँवों में एड्स फैलने पर चिंता30 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस एड्सः लक्ष्य ना पाने पर क्षमायाचना28 नवंबर, 2005 | विज्ञान एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ी21 नवंबर, 2005 | विज्ञान भारत में बढ़ा एड्स का ख़तरा21 नवंबर, 2005 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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