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नगालैंड पर बातचीत में गतिरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय नगा विद्रोही संगठन नैशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड, (एनएससीएन) ने कहा है कि भारत सरकार के साथ बातचीत में ठोस प्रगति के बिना वह युद्धविराम की अवधि बढ़ाने को तैयार नहीं है. एनएससीएन और भारत सरकार के बीच बैंकॉक में बातचीत चल रही है. एनएससीएन के महासचिव थियुंगलैंग मुइवा पहले ही बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में कह चुके हैं कि ये आख़िरी बार होगा जबकि युद्धविराम की अवधि बढ़ाई जाएगी और इस बीच भारत सरकार से वे ठोस प्रगति की उम्मीद करते हैं. एनएससीएन के प्रवक्ता सैमसन जोजो ने सोमवार को कहा कि शांति वार्ता का कोई नतीजा निकलना चाहिए, “बातचीत की प्रक्रिया 1997 से चल रही है लेकिन सिर्फ़ बातचीत करते रहने का कोई फ़ायदा नहीं है, राजनीतिक प्रस्तावों पर भारत सरकार को बातचीत में आगे बढ़ना चाहिए और किए गए वादे निभाए जाने चाहिए.” प्रवक्ता ने कहा, “हमने इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण फ़ैसले किए हैं. हम पूर्ण स्वतंत्रता की माँग से पीछे हटे हैं और भारतीय संघ के साथ विशेष रिश्ता रखने की बात मानी है लेकिन हमारी बातें मानी नहीं जा रहीं.” माँगें बैंकॉक से वरिष्ठ भारतीय पत्रकार भारत भूषण का कहना है कि सारा मामला अटका है राजनीतिक माँगों पर. भारत भूषण कहते हैं कि एनएसीएन चाहता है कि वो युद्धविराम को सिर्फ़ तीन महीने के लिए बढ़ाए और इस बीच राजनीतिक माँगों पर काम किया जाए जबकि भारत सरकार चाहती है कि युद्धविराम कम से कम छह महीने के लिए बढ़ाया जाए. राजनीतिक माँगों के बारे में एनएससीएन के महासचिव थियुंगलैंग मुइवा का कहना है कि मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश के नगा बहुल इलाक़ों को मिलाकर नगालैंड बनाने की माँग पर भी सरकार कुछ नहीं कर रही है.
इस माँग के बारे में भारत सरकार का कहना है कि ये तीन राज्य ऐसा करने को तैयार नहीं हैं. इसके अलावा एनएससीएन का दावा है कि वाजपेयी सरकार ने ग़ैर आधिकारिक तौर पर वादा किया था कि युद्धविराम के दौरान भारतीय सेना एनएससीएन के कार्यकर्ताओं पर नगालैंड के बाहर के इलाक़ों में भी हमले नहीं करेगी. लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राज्य के बाहर एनएससीएन के कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए हैं जोकि नहीं होने चाहिए. साथ ही एनएससीएन का कहना है कि उनके विरोधी खपलांग गुट के साथ मिलकर भारतीय सेना काम कर रही है जोकि उन्हें मंज़ूर नहीं है. एनएससीएन ने बातचीत में भारत सरकार से पूछा है कि जब नगालैंड में बातचीत उन्हीं के साथ चल रही है तो फिर साथ ही साथ उन्हें कमज़ोर बनाने की कोशिश से क्या फ़ायदा हो सकता है. भारत को ओर से बातचीत की अगुवाई केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फ़र्नांडिस कर रहे हैं और फ़िलहाल वो मीडिया से बात करने से बच रहे हैं. बातचीत की प्रक्रिया पहले भी खटाई में पड़ चुकी है जिस पर नगालैंड में शांति के समर्थन में रैलियाँ भी हो चुकी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नगा एकीकरण की माँग दोहराई16 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'भारत पर अब और विश्वास नहीं...'27 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस संघर्षविराम की अवधि छह महीने बढ़ी 31 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस नगालैंड में हिंसा में सात लोगों की मौत24 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस उग्रवाद के साए में ही रहे पूर्वोत्तर के राज्य22 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस नगा नेता मिले मनमोहन सिंह से07 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस नगालैंड और असम में हिंसा, 56 की मौत02 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस बाग़ियों ने वाजपेयी का प्रस्ताव ठुकराया07 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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