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बाग़ियों ने वाजपेयी का प्रस्ताव ठुकराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर भारत के छह प्रमुख अलगाववादी संगठनों ने भारतीय प्रधानमंत्री के बिना शर्त बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. उन्होंने कहा है कि वे भारत सरकार के साथ बातचीत तभी करेंगे जब ये वार्ता संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में होगी और इसमें संप्रभुता के मुद्दे पर चर्चा होगी. भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हाल ही में असम के गुवाहाटी शहर में अपने दौरे के दौरान अलगाववादियों के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा था. जिन गुटों ने प्रधानमंत्री का प्रस्ताव ठुकराया है उनमें दो संगठन, अल्फ़ा और एनडीएफ़बी, असम में सक्रिय हैं. तीन संगठन मणिपुर और एक त्रिपुरा में अपना आँदोलन चला रहे हैं. इन छह संगठनों ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि नगा अलगाववादी संगठन एनएससीएन के साथ भारत सरकार की बातचीत में धीमी प्रगति के कारण ये संगठन बातचीत से हिचक रहे हैं. नगा बातचीत उल्लेखनीय है कि नगा संगठन, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड, पिछले सात साल से भारत सरकार से बातचीत कर रहा है जिसका अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है. पिछले सप्ताह असम के चरमपंथी संगठन, युनाईटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम के सैनिक दस्ते के प्रमुख परेश बरूआ ने बीबीसी को बताया कि अगर बातचीत से पाँच दशक पुरानी नगा समस्या का कोई हल निकलता है तो संभवतः दूसरे अलगाववादी भी बातचीत के लिए आगे क़दम बढ़ाएंगे. पूर्वोत्तर भारत के अधिकत अलगाववादी विद्रोही संगठनों ने इस महीने होनेवाले आम चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की है. |
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