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गुरुवार, 26 जनवरी, 2006 को 08:09 GMT तक के समाचार
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'मलफ़ोर्ड के बयान में कांग्रेस की भावना'
मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश
अमरीका और भारत के बीच असैनिक परमाणु कार्यक्रमों पर समझौता जुलाई 2005 में हुआ था
अमरीका ने कहा है कि भारत में अमरीकी राजदूत ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर मतदान के संदर्भ में जो विचार व्यक्त किए वे उनके निजी विचार हैं हालाँकि उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस के सदस्यों की प्रबल भावना को प्रतिबिंबित किया है.

भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड ने बुधवार को कहा था कि अगर भारत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की बैठक में ईरान के रुख़ का समर्थन किया तो परमाणु समझौते पर असर पड़ सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अमरीकी राजदूत ने कहा कि ऐसी स्थिति में अमरीकी काँग्रेस प्रस्तावित परमाणु समझौते पर विचार करना रोक सकती है.

लेकिन भारत ने इस बयान पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि आईएईए की बैठक में भारत जो भी रुख़ अपनाएगा, वो भारत का अपना स्वतंत्र फ़ैसला होगा.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मलफ़ोर्ड ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर रुख़ से अमरीका-भारत परमाणु समझौते पर संभावित असर के बारे में मलफ़ोर्ड की यह निजी राय थी.

अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सियन मैक्करमैक ने हालाँकि यह भी कहा है कि मलफ़ोर्ड उस "प्रबल भावना" को प्रतिबंबित कर रहे थे जो ईरान के परमाणु मुद्दे पर अमरीकी कांग्रेस में नज़र आती है.

प्रवक्ता ने कहा कि अमरीकी कांग्रेस के सदस्य ऐसी ज़रूरत समझते हैं कि "अंतरराष्ट्रीय समुदाय परमाणु हथियार हासिल करने के ईरान के इरादे के ख़िलाफ़ निर्णायक और मज़बूत रुख़ अपनाए."

प्रवक्ता ने कहा कि सितंबर 2005 में भारत ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में अमरीका के साथ ही मतदान किया था.

प्रवक्ता सियन मैक्कॉरमैक ने कहा, "हम निश्चित रूप से प्रोत्साहित करेंगे और हमें आशा है कि भारत इस बार ईरान के परमाणु मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र को भेजने के समर्थन में मतदान करेगा लेकिन अंततः यह उनका अपना फ़ैसला होगा."

ग़ौरतलब है कि अमरीका और कुछ अन्य पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के लिए यह कार्यक्रम चलाना चाहता है जबकि ईरान असैनिक उद्देश्यों के लिए अपना परमाणु कार्यक्रम चलाने की बात कहता है.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर आईएईए की आपात बैठक दो और तीन फरवरी को होने वाली है और इस बैठक में ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है.

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