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ईरान पर भारतीय रूख़ पर अमरीकी नज़र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में अमरीका के राजदूत ने कहा है कि अगर भारत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की बैठक में ईरान के रुख़ का समर्थन किया तो परमाणु समझौते पर असर पड़ सकता है. समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अमरीकी राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड ने कहा कि अमरीकी काँग्रेस प्रस्तावित परमाणु समझौते पर विचार करना रोक सकता है. लेकिन भारत ने इस बयान पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि आईएईए की बैठक में भारत जो भी रुख़ अपनाएगा, वो भारत का अपना स्वतंत्र फ़ैसला होगा. भारतीय विदेश मंत्रालयल के प्रवक्ता नवतेज सरना की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि भारत इस मामले को भारत और अमरीका के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते से जोड़ने की किसी भी कोशिश को ठुकराता है. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते पर भारत अपने देशहित का ख़्याल रखते हुए आगे बढ़ेगा और अमरीकी राजदूत ने भी इसे स्वीकार किया है. ईरान के मामले पर आईएईए की आपात बैठक दो फरवरी को होने वाली है और इस बैठक में ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है. मतदान यूरोपीय देशों का मानना है कि ईरान का मामला सुरक्षा परिषद के पास भेजने के लिए उनके पास पर्याप्त वोट हैं लेकिन वे रूस, चीन और भारत जैसे अन्य विकासशील देशों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ भारत में अमरीकी राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड ने कहा है कि ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में भेजने के ख़िलाफ़ अगर भारत ने मतदान किया तो अमरीकी काँग्रेस के सदस्यों के सामने इसका असर 'विनाशकारी' हो सकता है. पीटीआई को दिए इंटरव्यू के अनुसार अमरीकी राजदूत ने कहा कि उनका मानना है कि अमरीका काँग्रेस इस परमाणु समझौते पर विचार करना रोक सकता है और ये पहल अमरीकी काँग्रेस में ही ख़त्म हो सकती है. पिछले साल जुलाई में भारत और अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते के मुताबिक अमरीका भारत के साथ नागरिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले परमाणु तकनीक को आपस में बाँटेगा और परमाणु ईंधन उपलब्ध कराएगा. बदले में भारत अपने परमाणु केंद्रों की अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों से निरीक्षण की अनुमति देगा और भारत को अन्य राहत भी मिलेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान समझौते के लिए तैयार: लारीजानी18 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना रूस और चीन ने कहा धैर्य ज़रूरी17 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना परमाणु क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा18 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना परमाणु ऊर्जा पर भारत उत्साहित19 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना 'परमाणु कार्यक्रम के साथ समझौता नहीं'03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस 'अमरीका को कोई हक़ नहीं है'03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस परमाणु नीति में बदलाव पर चिंता03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस मिसाइल परीक्षणों की सूचना दी जाएगी06 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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