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भारत ने राजदूत को बुलाकर आपत्ति जताई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने ईरान के मामले में अमरीकी राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. डेविड मलफ़ोर्ड ने बुधवार को एक समाचार एजेंसी के साथ इंटरव्यू में कहा था कि ईरान के समर्थन के कारण परमाणु समझौते पर असर हो सकता है. गुरुवार को भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन ने अमरीकी राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड को बुलाकर भारत की भावना से अवगत कराया. श्याम सरन ने कहा कि उनका बयान 'अनुचित और दो लोकतांत्रिक देशों के बीच गहरे रिश्ते स्थापित करने के अनुकूल' नहीं है. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी गई है. बयान के अनुसार अमरीकी राजदूत को यह बता दिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की बैठक में ईरान के परमाणु मुद्दे पर अगर मतदान हुआ, तो इस पर भारत ख़ुद निर्णय करेगा. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार अमरीकी राजदूत ने अपने बयान पर खेद जताया और कहा कि उनके बयान का ग़लत मतलब निकाला गया है. मक़सद अमरीकी राजदूत ने विदेश सचिव को बताया कि उनका ये मक़सद नहीं था कि वे किसी भी मुद्दे पर भारत के अधिकार को चुनौती देना चाहते थे. इस बीच अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान के मुद्दे पर अमरीकी राजदूत ने जो कुछ कहा है वह उनके अपने विचार है हालाँकि उन्होंने इस मुद्दे पर अमरीकी काँग्रेस के सदस्यों की प्रबल भावना को ही सामने रखा है. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मलफ़ोर्ड ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर रुख़ से अमरीका-भारत परमाणु समझौते पर संभावित असर के बारे में मलफ़ोर्ड की यह निजी राय थी. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सियन मैक्करमैक ने हालाँकि यह भी कहा है कि मलफ़ोर्ड उस "प्रबल भावना" को प्रतिबंबित कर रहे थे जो ईरान के परमाणु मुद्दे पर अमरीकी कांग्रेस में नज़र आती है. प्रवक्ता ने कहा कि अमरीकी कांग्रेस के सदस्य ऐसी ज़रूरत समझते हैं कि "अंतरराष्ट्रीय समुदाय परमाणु हथियार हासिल करने के ईरान के इरादे के ख़िलाफ़ निर्णायक और मज़बूत रुख़ अपनाए." प्रवक्ता ने कहा कि सितंबर 2005 में भारत ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में अमरीका के साथ ही मतदान किया था. प्रवक्ता सियन मैक्कॉरमैक ने कहा, "हम निश्चित रूप से प्रोत्साहित करेंगे और हमें आशा है कि भारत इस बार ईरान के परमाणु मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र को भेजने के समर्थन में मतदान करेगा लेकिन अंततः यह उनका अपना फ़ैसला होगा." ग़ौरतलब है कि अमरीका और कुछ अन्य पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के लिए यह कार्यक्रम चलाना चाहता है जबकि ईरान असैनिक उद्देश्यों के लिए अपना परमाणु कार्यक्रम चलाने की बात कहता है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर आईएईए की आपात बैठक दो और तीन फरवरी को होने वाली है और इस बैठक में ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मलफ़ोर्ड के बयान में कांग्रेस की भावना'26 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान पर भारतीय रूख़ पर अमरीकी नज़र25 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्या कहा अमरीकी राजदूत ने?26 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान समझौते के लिए तैयार: लारीजानी18 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना रूस और चीन ने कहा धैर्य ज़रूरी17 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना परमाणु क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा18 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना परमाणु ऊर्जा पर भारत उत्साहित19 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना 'परमाणु कार्यक्रम के साथ समझौता नहीं'03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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