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सोमनाथ को सुप्रीम कोर्ट से भी नोटिस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संसद में प्रश्न पूछने के लिए रिश्वत लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को नोटिस जारी किया है. इसके अतिरिक्त न्यायालय ने इस मामले को संविधान पीठ को भी भेज दिया है. बहुजन समाज पार्टी के सदस्य राजाराम पाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा सचिव के मार्फ़त यह नोटिस भेजा है. इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामले में नोटिस जारी किया है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने साफ़ कह दिया है कि यह मामला अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और किसी नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया जाएगा. उल्लेखनीय है कि प्रश्न पूछने के लिए रिश्वत लेते हुए कैमरे में क़ैद होने वाले 11 सांसदों को संसद से निष्कासित कर दिया गया था. इसके बाद नौ सांसदों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. संविधान पीठ न्यायमूर्ति वाईके सभरवाल के नेतृत्व वाले तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है. इन पीठ ने सीके ठक्कर और आरवी रविन्द्रन भी थे. पीठ ने इस मामले को पाँच जजों के एक संविधान पीठ को भेजते हुए कहा है कि संविधान पीठ इस पर फ़ैसला करे कि इस कठिन संवैधानिक मसले पर क्या किया जाए. अटार्नी जनरल मिलॉन बैनर्जी से पीठ ने अदालत का सहयोग करने को कहा है. न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि निष्कासित सांसद के क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया पर रोक न लगाई जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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