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सार्क में भी छाया 'आतंकवाद' का मुद्दा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ढाका में चल रहे दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सदस्य देशों के बीच सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सार्क शिखर सम्मेलन में आतंकवाद और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रहा. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 13वें सार्क सम्मेलन की शुरुआत शनिवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई. बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ज़ोर देकर कहा, ''सदस्य देशों के बीच सीमापार से हो रहे आतंकवाद को बिल्कुल सहन नहीं किया जाना चाहिए.'' उनका कहना था कि एक दूसरे के ख़िलाफ़ काम कर रहे अपराधियों और छापामार गुटों को शरण देना और उनकी सहायता करना सार्क की स्थापना के उद्देश्यों के परे है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. मनमोहन सिंह का कहना था, ''आपसी विश्वास और आतंकवाद से निपटने की इच्छा शाक्ति के बिना जिस तरह की प्रगति की हम आशा कर रहे हैं, वह कभी पूरी नहीं हो पाएगी.'' नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सफ़ाई दी कि कि नेपाल में आपातकाल जैसा क़दम मज़बूरी में उठाना पड़ा. उन्होंने घोषणा की कि 2007 तक देश में चुनाव करा दिए जाएँगे. भूकंप और सूनामी सभी नेताओं ने भूकंप और सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से मिलकर निपटने की मंशा जताई. साथ ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया ने ज़ोर देकर कहा कि 2006 से 2015 के दशक को ग़रीबी उन्मूलन के दशक के रूप में देखा जाए. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने पाकिस्तान की अध्यक्षता में राजनीतिक माहौल को बेहतर बनाने, शांति और स्थिरता के लिए किए गए कामों को गिनवाया. उनका कहना था कि पाकिस्तान और भारत के बीच बेहतर संबंधों से सारे महाद्वीप के माहौल में सुधार हुआ है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने कश्मीर समेत सभी मुद्दों को सुलझाने की दिशा में क़दम उठाए गए हैं. साथ ही उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान को सार्क देशों में शामिल करने और चीन को पर्यवेक्षक का दर्जा दिए जाने के मामले को सभी देशों के लिए विचार के लिए रखा. भारत ने ग़रीबी उम्मूलन के लिए बनाए कोष को दक्षिण एशिया विकास कोष का नाम देने का प्रस्ताव रखा और आर्थिक सहयोग का उद्देश्य पूरा न होने की भी चर्चा की. सभी देशों ने आशा व्यक्त की कि दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार संधि या साफ़्टा पर 2006 में समझौता हो जाएगा. पर साथ ही क्षेत्र के छोटे देशों के हितों पर ध्यान रखने और एक दूसरे के प्रति लचीला रवैया अपनाने पर भी ज़ोर दिया. बैठक में सुरक्षा, ऊर्जा, यातायात, पर्यटन और संस्कृति जैसे मुद्दे भी उठाए गए. इन सब पर सार्क क्या कर पाता है, इस पर सबकी नज़र रहेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें ढाका में सार्क देशों का सम्मेलन शुरु12 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस ढाका में सार्क सम्मेलन आज से12 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत अब सार्क बैठक के लिए तैयार24 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस भारत के फ़ैसले से बांग्लादेश, पाक नाराज़02 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस सार्क शिखर सम्मेलन फिर स्थगित 02 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस तबाही के कारण सार्क सम्मेलन स्थगित30 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस सार्क देशों के लेखकों का सम्मेलन07 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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