BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 10 नवंबर, 2005 को 12:37 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बाल धावक के शोषण की आशंका
बिरंची दास के साथ बुधिया सिंह
बिरंची दास बुधिया को प्रशिक्षण दे रहे हैं
भारत के उड़ीसा राज्य के अधिकारियों ने आशंका व्यक्त की है कि तीन वर्षीय मैराथन धावक बुधिया सिंह का शोषण हो रहा है.

हाल ही में दिल्ली में हुए मैराथन में दौड़ लगाने वाले बुधिया सिंह कई टीवी विज्ञापनों में भी नज़र आने लगे हैं.

राज्य सरकार का कहना है कि इतनी लंबी दूरी तक दौड़ने की वजह से इस बालक के हृदय और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ सकता है.

लेकिन बुधिया के कोच बिरंची दास ने इन आशंकाओं को निराधार बताया है और कहा है कि उसकी नियमित मेडिकल जाँच की जाती है.

उड़ीसा के खेल मंत्री देवाशीष नायक का कहना है कि "सरकार बच्चे के शोषण की मूक दर्शक नहीं बनी रहेगी और ज़रूरत पड़ी तो उसके भविष्य को बचाने के लिए हस्तक्षेप करेगी."

हाल ही में बुधिया ने तीर्थनगर पुरी से भुबनेश्वर तक की दौड़ लगाई है जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है, इससे पहले वह भुबनेश्वर से कटक तक 35 किलोमीटर की दौड़ लगा चुका है.

पिछले दिनों उड़ीसा के दौरे पर गईं ओलंपियन पीटी उषा ने भी कहा था कि इतनी लंबी दूरी तक दौड़ना दीर्घकाल में बुधिया के लिए नुक़सानदेह हो सकता है.

लेकिन बिरंची कहते हैं, "तीन डॉक्टरों का एक दल बुधिया की नियमित जाँच करता है, बुधिया पूरी तरह स्वस्थ है, मुझे समझ में नहीं आता कि लोगों को इतनी चिंता क्यों है."

भत्ता

राज्य सरकार ने बुधिया को हर महीने 500 रूपए का भत्ता देने की घोषणा की है लेकिन पेशे से जूडो कोच दास का कहना है कि "इतने पैसे तो दो दिन के लिए भी काफ़ी नहीं हैं."

स्थानीय जूडो एसोसिएशन के अध्यक्ष बिरंची दास का कहना है कि बुधिया जन्मजात तौर पर विलक्षण है और उसमें अपार ऊर्जा है.

उन्होंने अब बुधिया के लिए बहुत ही अनुशासित दिनचर्या तैयार की है, जिसमें उनके खानपान और अभ्यास का विशेष ध्यान रखा गया है.

बुधिया को अपनी माँ के साथ रहने पर सिर्फ़ भात ही खाने को मिलता था लेकिन अब उसे अंडे, दूध और माँस सहित संतुलित भोजन दिया जा रहा है.

66छोटे कंधों पर बड़ा भार
छत्तीसगढ़ में कई बच्चे खेलने-कूदने की उम्र में दफ़्तरों में काम कर रहे हैं.
66सहमा, डरा सा बचपन
ऊँटों की सवारी के खेल में इस्तेमाल होने वाले 22 बच्चे पाकिस्तान लौटे हैं.
66गुजरात के परेशान बच्चे
गुजरात दंगों के तीन बरस बाद भी बच्चों की परेशानी दूर नहीं हुई है.
66बदनाम गलियों के बच्चे
मुंबई की बदनाम गलियों के बच्चों की नज़र में ज़िंदगी क्या है. उनकी आपबीती.
इससे जुड़ी ख़बरें
बच्चे ज़्यादा तो पानी कम
08 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस
अनाथ बच्चे का डीएनए परीक्षण
09 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>