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बाल धावक के शोषण की आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के उड़ीसा राज्य के अधिकारियों ने आशंका व्यक्त की है कि तीन वर्षीय मैराथन धावक बुधिया सिंह का शोषण हो रहा है. हाल ही में दिल्ली में हुए मैराथन में दौड़ लगाने वाले बुधिया सिंह कई टीवी विज्ञापनों में भी नज़र आने लगे हैं. राज्य सरकार का कहना है कि इतनी लंबी दूरी तक दौड़ने की वजह से इस बालक के हृदय और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ सकता है. लेकिन बुधिया के कोच बिरंची दास ने इन आशंकाओं को निराधार बताया है और कहा है कि उसकी नियमित मेडिकल जाँच की जाती है. उड़ीसा के खेल मंत्री देवाशीष नायक का कहना है कि "सरकार बच्चे के शोषण की मूक दर्शक नहीं बनी रहेगी और ज़रूरत पड़ी तो उसके भविष्य को बचाने के लिए हस्तक्षेप करेगी." हाल ही में बुधिया ने तीर्थनगर पुरी से भुबनेश्वर तक की दौड़ लगाई है जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है, इससे पहले वह भुबनेश्वर से कटक तक 35 किलोमीटर की दौड़ लगा चुका है. पिछले दिनों उड़ीसा के दौरे पर गईं ओलंपियन पीटी उषा ने भी कहा था कि इतनी लंबी दूरी तक दौड़ना दीर्घकाल में बुधिया के लिए नुक़सानदेह हो सकता है. लेकिन बिरंची कहते हैं, "तीन डॉक्टरों का एक दल बुधिया की नियमित जाँच करता है, बुधिया पूरी तरह स्वस्थ है, मुझे समझ में नहीं आता कि लोगों को इतनी चिंता क्यों है." भत्ता राज्य सरकार ने बुधिया को हर महीने 500 रूपए का भत्ता देने की घोषणा की है लेकिन पेशे से जूडो कोच दास का कहना है कि "इतने पैसे तो दो दिन के लिए भी काफ़ी नहीं हैं." स्थानीय जूडो एसोसिएशन के अध्यक्ष बिरंची दास का कहना है कि बुधिया जन्मजात तौर पर विलक्षण है और उसमें अपार ऊर्जा है. उन्होंने अब बुधिया के लिए बहुत ही अनुशासित दिनचर्या तैयार की है, जिसमें उनके खानपान और अभ्यास का विशेष ध्यान रखा गया है. बुधिया को अपनी माँ के साथ रहने पर सिर्फ़ भात ही खाने को मिलता था लेकिन अब उसे अंडे, दूध और माँस सहित संतुलित भोजन दिया जा रहा है. |
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