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'मृतकों की संख्या 87 हज़ार के पार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अक्तूबर में दक्षिण एशिया में आए भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 87 हज़ार से ज़्यादा हो गई है. पिछली बार दी गई 74 हज़ार की संख्या से ये संख्या 13 हज़ार ज़्यादा है. ये घोषणा पाकिस्तान सरकार ने एक अंतरराष्ट्रीय दल के आकलन के बाद की है. विश्व बैंक और एशिया विकास बैंक के अधिकारी पाकिस्तान में हताहतों की संख्या जानने की कोशिश में जुटे थे. इन अधिकारियों ने बताया कि 13 हज़ार और लोगों के मारे जाने के बारे में पता चला है. धनराशि की कमी संयुक्त राष्ट्र लगातार कहता आया है कि अगर दक्षिण एशिया में आए भूकंप के बाद राहत कार्यों पर ज़ोर नहीं दिया गया तो मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि उसे 55 करोड़ डॉलर धन राशि की ज़रूरत है लेकिन उसे 13 करोड़ डॉलर ही मिले हैं. इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा था कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों के लिए बहुत कम मदद मिली है और ये दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दोहरे मापदंड हैं. उनका कहना था कि कई देश एशिया में सुनामी के बाद और अमरीका में कैटरीना तूफ़ान से हुई तबाही के बाद उदारता दिखाते हुए मदद देने के लिए सामने आए थे. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने तो यहाँ तक कहा था कि यदि भूकंप से पश्चिमी लोग प्रभावित हुए होते तो शायद दाता देश ज़्यादा मदद करते. उधर भूकंप प्रभावितों की मदद करने के लिए कश्मीर में नियंत्रण रेखा खोल दी गई है. सोमवार को कुछ राहत सामग्री पाकिस्तान भेजी भी गई लेकिन फ़िलहाल आम लोगों के आने जाने पर रोक लगी हुई है. | इससे जुड़ी ख़बरें नियंत्रण रेखा राहत सामग्री के लिए खुली07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'चार हफ़्ते में सब कुछ नहीं सुधर सकता'06 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'लोगों को सर्दी से बचाना है प्राथमिकता'06 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ ने एफ़-16 विमानों की ख़रीद टाली04 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'भूकंप में 17 हज़ार बच्चों की मौत'31 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस राहत कार्यों पर पैसे की कमी की मार28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस राहत कार्यों पर पैसे की कमी की मार28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस सिखों का दल मदद करने पहुँचा 26 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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