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शुक्रवार, 04 नवंबर, 2005 को 06:23 GMT तक के समाचार
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मुशर्रफ़ ने एफ़-16 विमानों की ख़रीद टाली
एफ़-16
अमरीका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान देने का फ़ैसला किया था
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि वो अमरीका से एफ़-16 विमानों की ख़रीद फ़िलहाल रोक रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस वक़्त भूकंप पीड़ितों पर संसाधन लगाने की ज़रूरत है.

ये घोषणा उन्होंने पाकिस्तान के भूकंप प्रभावित इलाक़ों के दौरे पर कही.

पाकिस्तान सरकार करीब 50 एफ़-16 विमान ख़रीदने वाली थी और हर विमान की कीमत चार करोड़ डॉलर है.

इससे पहले राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा था कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों के लिए बहुत कम मदद मिलना ये दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दोहरे मापदंड हैं.

उनका कहना था कि अनेक देश एशिया में सुनामी के बाद और अमरीका में कैटरीन तूफ़ान से हुई तबाही के बाद उदारता दिखाते हुए काफ़ी मदद देने के लिए सामने आए थे.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने तो यहाँ तक कह दिया कि यदि भूकंप से पश्चिमी लोग प्रभावित हुए होते तो शायद दाता देश ज़्यादा मदद करते.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने गुरुवार को कहा था कि आठ अक्तूबर के भूकंप में मरने वालों की संख्या 73 हज़ार से ज़्यादा है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से और मदद देने की अपील की. महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान में भूकंप प्रभावितों की मदद के लिए दाता देशों का एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है.

मात्र एक-चौथाई राशि मिली

अब भी लाखों लोगों तक सहयाता नहीं पहुँच पाई
उधर राहत के लिए संयुक्त राष्ट्र के मुख्य संयोजक यान एग्लैन ने कहा कि पाकिस्तान में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए जितनी धन-राशि चाहिए उसका मात्र एक-चौथाई ही मिला है.

उनका कहना था कि कई देश ये नहीं समझ पाए हैं कि ये कितनी बड़ी आपदा है.

ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास सचिव हिलेरी बेन ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतिक्रिया की आलोचना की है.

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन और मदद देगा लेकिन हर ओर से ज़्यादा मदद की ज़रूरत है.

ख़बरों के अनुसार सूबा सरहद के 41 गाँवों में अब तक राहत दल नहीं पहुँच पाए हैं और इन गाँवों तक पहुँचने के रास्ते भी भूकंप में तबाह हो गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने तीस करोड़ डॉलर की मदद की अपील की है ताकि टेंट, गर्म कपड़े इत्यादि प्रभावित लोगों तक पहुँचाए जा सकें.

उनका ये भी कहना था कि हेलिकॉप्टर सेवा को चलाते रखने के लिए भी पैसों की ज़रूरत है.

यान एग्लैन का कहना था कि कई देश पुनर्निर्माण परियोजनाओं में मदद करना चाहते हैं लेकिन उसका क्या लाभ होगा यदि भूकंप से प्रभावति लोगों की जान ही न बचाई जा सकी.

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