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बुधवार, 26 अक्तूबर, 2005 को 18:40 GMT तक के समाचार
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सिखों का दल मदद करने पहुँचा

हरजीत सिंह अपनी टीम से संदस्यों के साथ
मलबे से जो लोग निकाले जा सके उनमें से बहुत से ज़ख़्मों का समय पर इलाज नहीं हो सका है
पाकिस्तान के भूकंप प्रभावित क्षेत्र का हज़ारों मील दूर मलेशिया से भला क्या संबंध हो सकता है?

ये संबंध तब बना जब मलेशिया में तीन पीढ़ियों से बसे एक सिख हरजीत सिंह अपने सात मित्रों के साथ भूकंप पीड़ितों की मदद करने के लिए पाकिस्तान पहुँच गए.

वे पाकिस्तान के सूबा सरहद के शहर बटग्राम में दवाएँ और राहत सामग्री लेकर पहुँचे और आजकल वहाँ एक मोबाइल यानि चलता-फिरता क्लिनिक चला रहे हैं.

बटग्राम में 38 सिख परिवार बसे हुए थे लेकिन वे सभी भूकंप के बाद बेघर हो गए.

 हमें किसी ने नहीं बुलाया. जब हमें पता चला कि इतना भयानक भूकंप आया है और तबाही हुई है तो मित्रों से कहा और मदद करने के लिए आ पहुँचे
हरजीत सिंह

जब हरजीत से पूछा गया कि क्या उनके कोई रिश्तेदार बटग्राम में रहते हैं या फिर उन्हें विशेष तौर पर बुलाया गया, तो उनका कहना था, "जी नहीं, किसी ने नहीं बुलाया. जब हमने अख़बार में पढ़ा कि इतना भयानक भूकंप आया है और तबाही हुई है तो मित्रों को इकट्ठा किया और मदद करने के लिए आ पहुँचे."

उन्होंने बताया कि कुछ दवाएँ तो वे साथ लाए थे लेकिन अधिकतर पाकिस्तान पहुँचने पर ही ख़रीदीं और कुछ दवाएँ पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उपलब्ध करवाईं.

हरजीत की टीम में उनकी एक महिला साथी जगदीश कौर से लोगों में उनके वहाँ पहुँचने पर हुई प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "पहले अपने बीच सिख राहतकर्मियों की टीम को देख लोगों को अजीब लगा, लेकिन फिर औरतों और बच्चों का इलाज शुरु हुआ और फिर सब लोगों ने ये मान लिया कि ये टीम हमारी मदद के लिए पहुँची है."

 पहले अपने बीच सिख राहतकर्मियों को देख लोगों को अजीब लगा, लेकिन फिर औरतों और बच्चों का इलाज शुरु हुआ और फिर सब लोगों ने ये मान लिया कि ये टीम हमारी मदद के लिए पहुँची है
राहतकर्मी जगदीश कौर

टीम के एक अन्य सदस्य डॉक्टर स्वर्ण सिंह का कहना था कि भूकंप का प्रकोप हर धर्म, जाति के व्यक्ति पर हुआ और वे भी सभी के उपचार के लिए दिन-रात चलता-फिरता क्लिनिक चलाकर पीड़ित लोगों का उपचार कर रहे हैं.

गुरुद्वारा कमेटी भी सक्रिय

महत्वपूर्ण है कि भूकंप पीड़ितों के लिए पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी राहत सामग्री देने के लिए आगे आई है और उसकी ओर से सभी को राहत सामग्री बाँटी जा रही है.

बटग्राम और मुज़्ज़फ़राबाद में 24 घंटे 'गुरु का लंगर' जारी है यानि किसी भी समय कोई भी भोजन का सेवन कर सकता है. इसके अलावा अस्पतालों में खाना पहुँचाया जा रहा है, कमेटी ने दस ट्रक राहत पहुँचाई है.

प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन पश्तो भाषी मस्तान सिंह का कहना था, "चंदा जुटाने के लिए हमने पहले खाता खोला, फिर भारत से हमें 17 हज़ार कंबल और दो हज़ार टेंट मिले जो पीड़ितों तक पहुँचाए जा चुके हैं."

66तुरंत उपचार ज़रुरी
तत्काल उपचार की व्यवस्था नहीं की गई तो घायलों की हालत बिगड़ सकती है.
66कूटनीति अब भी जारी है
भूकंप के बावजूद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीति बिना रुके जारी है.
66कश्मीरियों की पीड़ा
वो दिन कब आएगा जब कोई सीमा रेखा से बटे कश्मीरियों की पीड़ा समझेगा.
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