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महीने भर बाद मरने वालों की संख्या पर मतभेद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि वो इस बात की पुष्टि नहीं कर सकती कि भूकंप में मरने वालों की संख्या 74 हज़ार से बढ़कर 87 हज़ार हो गई है. सरकारी राहत आयोग के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि सरकार इस बात से सहमत नहीं है. ये बातें ऐसे समय पर हो रही हैं जबकि विनाशकारी भूकंप के झटकों को एक महीना पूरा हुआ है. आठ अक्तूबर को आए भूकंप के बाद अब पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुँचाने की कोशिशें चल रही हैं. मरने वालों की संख्या पर दूसरे सूत्रों की आई रिपोर्टों से सरकार के आँकड़े कम रहे हैं. मृतकों की संख्या को लेकर संशय का माहौल उस वक़्त पैदा हुआ जब मंगलवार को वित्त मंत्रालय के सलाहकार इक़बाल अहमद खान ने ये संख्या 87 हज़ार बताई. इक़बाल अहमद खान ने बताया कि उन्हें ये जानकारी विश्व बैंक और एशिया विकास बैंक के अधिकारियों से मिली. इक़बाल अहमद खान ने कहा कि दोनों बैंकों ने कहा है कि उन इलाक़ों से भी मरने वालों की संख्या मिली है जो अब तक कटे हुए थे. लेकिन पाकिस्तान के केंद्रीय राहत आयोग का कहना है कि मृतकों की संख्या अब भी 73276 है. मदद उधर संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि सर्दी शुरू होने से मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. संयुक्त राष्ट्र लगातार कहता आया है कि अगर राहत कार्यों पर ज़ोर नहीं दिया गया तो मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा था कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों के लिए बहुत कम मदद मिली है और ये दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दोहरे मापदंड हैं. इस बीच भूकंप प्रभावितों की मदद करने के लिए कश्मीर में नियंत्रण रेखा खोल दी गई है. सोमवार को कुछ राहत सामग्री पाकिस्तान भेजी भी गई लेकिन फ़िलहाल आम लोगों के आने जाने पर रोक लगी हुई है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मृतकों की संख्या 87 हज़ार के पार'08 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नियंत्रण रेखा राहत सामग्री के लिए खुली07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'चार हफ़्ते में सब कुछ नहीं सुधर सकता'06 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'लोगों को सर्दी से बचाना है प्राथमिकता'06 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ ने एफ़-16 विमानों की ख़रीद टाली04 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'भूकंप में 17 हज़ार बच्चों की मौत'31 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस राहत कार्यों पर पैसे की कमी की मार28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस राहत कार्यों पर पैसे की कमी की मार28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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