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सीमा खोलने की तैयारी के निर्देश
नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिक
नियंत्रण रेखा पर सीमा खोलने से पहले बारूदी सुरंगों को हटाने का काम करना पड़ेगा
भारतीय सेना को निर्देश दिए गए हैं कि वो भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ स्थानों पर नियंत्रण रेखा खोलने के लिए तैयार रहे ताकि दोनों तरफ़ के भूकंप प्रभावित लोगों को सहायता पहुँचाई जा सके और लोग आपस में मिल सकें.

आधिकारिक हवाले से सेना को जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर क़रीब पाँच जगहों पर सीमा खोलने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि इनमें से दो स्थान जम्मू क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं जिनमें से एक पुँछ और एक राजौरी ज़िले में होगा.

ये रास्ते कम से कम तीन फुट तक चौड़े होंगे ताकि लोग आसानी से इधर-उधर जा सकें.

अधिकारियों ने बताया कि दोनों ओर से आवागमन के मसले पर विचार विमर्श चल रहा है और जल्दी ही कोई निर्णय ले लिया जाएगा.

यह भी बताया गया कि पहले केवल तीन रास्ते ही खोले जाएंगे जो उड़ी, तंगधार और पुँछ में होंगे जबकि जम्मू क्षेत्र में पड़ने वाले बाक़ी के दो रास्ते कुछ समय के बाद खोले जाएंगे.

कठिन रास्ता

सैन्य सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय से आदेश मिलने के बावजूद इन स्थानों से खेतों में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने में क़रीब दो-तीन दिन का वक़्त लग जाएगा.

इस बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा है कि आपदा के इस वक़्त में इन जगहों की तुरंत शिनाख़्त करके रास्ता खोला जाना चाहिए ताकि दोनों ओर के लोग एक दूसरे से जल्दी से जल्दी मिल सकें.

ऐसी ही माँग हुर्रियत कांफ़्रेंस की ओर से भी की गई है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने हाल ही में कहा था कि वो नियंत्रण रेखा पर सीमाएँ खोले जाने का समर्थन करते हैं ताकि दोनों ओर के भूकंप प्रभावित लोगों की सहायता की जा सके.

ग़ौरतलब है कि भारत पहले ही चार जगहों उड़ी, जम्मू, श्रीनगर और तंगधार में मुफ़्त टेलीफ़ोन सेवा केंद्र स्थापित कर चुका है ताकि भारत प्रशासित कश्मीर के लोग अपने परिजनों से मुजफ़्फ़राबाद में सीधा संपर्क कर सकें.

आठ अक्तूबर को आए एक विनाशकारी भूकंप में 50 हज़ार से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, मतृक संख्या और बढ़ने की आशंका जताई गई है.

जबकि भारत प्रशासित कश्मीर में मृतकों की संख्या 1400 से ज़्यादा बताई गई है.

भूकंप के सबसे अधिक तबाही पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पर पड़ी है और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मुजफ़्फ़राबाद में सबसे ज़्यादा तबाही हुई है.

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