|
कुछ इलाक़ों में मदद पहुँची, लेकिन... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण एशिया में गत शनिवार को आए भूकंप से प्रभावित इलाक़ों में सहायता सामग्री पहुँचनी तो शुरू हो गई है लेकिन ऐसी ख़बरें मिल रही हैं कि राहत कार्यों में तालमेल का अभाव है. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि राहत कार्यों में तालमेल के अभाव को लेकर चिंताएँ जताई गई हैं और राहत सामग्री दूरदराज के इलाक़ों में अभी ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुँची है. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भूकंप के बाद हुई तबाही से बीमारियाँ फैलने की चेतावनी दी है. साथ ही राहत सामग्री की आपूर्ति तेज़ करने को भी कहा है. इस भूकंप से लगभग चालीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं जिसमें 23 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान भी जा चुकी है. इनमें से ज़्यादातर मौतें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हुई हैं. भारत प्रशासित कश्मीर में भी अधिकारियों ने कहा है कि भूकंप से लगभग 1300 लोगों की जान जा चुकी है लेकिन मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई है क्योंकि बहुत से इलाक़ों अब भी मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका है. जो लोग ज़िदा बचे हैं उनमें से बहुत से लोगों को अब भी पीने का साफ़ पानी नहीं मिल रहा है जिससे मलेरिया और हैजा जैसी बीमारियों का ख़तरा पैदा हो गया है. मुश्किलें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के सबसे ज़्यादा प्रभावित बालाकोट इलाक़े में मौजूद बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नोर्द का कहना है कि जो वाहन राहत सामग्री ला रहे हैं वे ट्रैफ़िक जाम में फँसे हुए हैं क्योंकि कई जगह भूस्खलन से रास्ता जाम हो गया है. कई जगह से ऐसी ख़बरें हैं कि राहत सामग्री ले जाने वाले वाहनों को लूटा भी जा रहा है और यह सामग्री ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुँच पा रही है. कुछ राहत सामग्री हेलीकॉप्टरों के ज़रिए पहुँचाने की कोशिशें की जा रही हैं लेकिन बालाकोट में अब भी हज़ारों लोग खुले में रहने के लिए मजबूर हैं. एंड्रयू नोर्द का कहना है कि राहत कार्यों में तालमेल के अभाव के लिए पाकिस्तानी सेना की आलोचना की जा रही है. लेकिन प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने राहत कार्यों को सही बताते हुए कहा है कि जैसे-जैसे रास्ते साफ़ होंगे, राहत कार्य और तेज़ किए जाएंगे.
कुछ ऐसे स्थानों में राहत सामग्री को लूटने की भी सूचनाएँ मिली हैं जो भूकंप से प्रभावित नहीं हुए हैं. भूकंप से प्रभावित इलाक़ों में घरों से सामान लूटने की भी ख़बरें हैं. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में मौजूद एक अन्य संवाददाता दुमीता लूथरा का कहना है कि वहाँ अभी पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री नहीं पहुँची है. लूथरा के अनुसार अब भी लोगों को खाना, पानी और सर्दी से बचने के लिए कंबलों का इंतज़ार कर रहे हैं. सड़कों पर अनेक शव पड़े हैं जिनके पर मक्खियाँ मंडरा रही हैं. मुज़फ़्फ़राबाद के पानी की आपूर्ति करने वाली नीलम नदी का पानी दूषित हो गया है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख ख़्वाजा शबीर का कहना था, "स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह से ठप हो गई हैं और मलेरिया और हैजा जैसी दूषित पानी से होने वाली बीमारिया फैलना शुरू हो गई हैं." शबीर ने बताया कि बीमारियों को रोकने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की गई है जिसके तहत शवों को तुरंत हटाना और हेलीकॉप्टरों के ज़रिए दवाइयाँ छिड़कने जैसे उपाय शामिल हैं. इस बीच तबाही का जायज़ा लेने के लिए अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस पाकिस्तान पहुँची हैं. नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े-
|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||