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पाकिस्तान में राहत को लेकर शिकायतें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भूकंप के बाद पाँचवे दिन ज़्यादातर इलाक़ों में राहत सामग्री और बचाव दलों के पहुँचने की ख़बर तो है लेकिन पीड़ित लोगों की शिकायतें भी ज़ोर पकड़ रही हैं. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद से बीबीसी के संवाददाता ज़ुल्फ़िक़ार अली का कहना है कि पहले के मुक़ाबले राहत और बचाव का काम तेज़ तो हुआ है लेकिन अब भी बहुत सारे इलाक़ों में तंबू, खाने का सामान और पीने का पानी नहीं पहुँचा है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मुज़फ़्फ़राबाद और आसपास के इलाक़ों में चल रहा राहत का काम बहुत ही अव्यवस्थित है, कई बार लोग रास्ते में ट्रकों को घेरकर सामान लूट रहे हैं और जहाँ मदद की ज़रूरत है वहाँ ख़ाली ट्रक पहुँच रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रधानमंत्री सिकंदर हयात ख़ान ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा, "इसमें कोई सच्चाई नहीं है कि ज़रूरतमंद लोगों तक मदद नहीं पहुँच रही है. शुरू में सड़कें बंद थीं इसलिए दिक़्कत हुई थी लेकिन अब तो सब ठीक चल रहा है." कोहिस्तान पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बहुत सारे इलाक़े ऐसे भी हैं जहाँ अभी तक राहत नहीं पहुँच सकी है. ऐसे ही एक क़स्बे कोहिस्तान में राहत के काम में जुटे महफ़ूजुल्लाह ने बीबीसी को बताया कि वहाँ सिर्फ़ स्थानीय स्तर पर ही राहत और बचाव के प्रयास चल रहे हैं.
उन्होंने कहा, "अभी तक कोई नहीं आया है, हमें यहाँ सबसे अधिक ज़रूरत है दवाओं की और डॉक्टरों की, लेकिन यहाँ तो एक फ़ोन तक नहीं आया है, लोग घायलों को कंधे पर उठाकर ले जा रहे हैं, केंद्र सरकार से कोई मदद नहीं मिली है." लेकिन पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री का दावा है कि कोहिस्तान समेत सभी इलाक़ों में राहत सामग्री और बचावकर्मी पहुँच गए हैं, वे कहते हैं कि अब रास्ते खुल गए हैं इसलिए अब पहले जैसी दिक्कत नहीं होगी. बैठक पाकिस्तान में बुधवार को नेशनल सिक्यूरिटी काउंसिल की बैठक भी हो रही है जिसमें भूकंप की स्थिति से बेहतर तरीक़े से निबटने के बारे में चर्चा होगी. वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार एहतेशाम उल हक़ का कहना है कि जिस तेज़ी से राहत का काम चलना चाहिए उस तेज़ी से नहीं चल रहा है, यह बात इस्लामाबाद में महसूस की जा रही है. एहतेशाम उल हक़ का कहना है कि इस बैठक में इस बात पर भी चर्चा होगी कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सहायता का पूरा उपयोग किस तरह कर सकता है. इसके अलावा भूकंप प्रभावित इलाक़ों में बीमारियाँ फैलने की आशंका व्यक्त की जा रही है क्योंकि बहुत बड़ी तादाद में लाशें सड़ रही हैं जिनको दफ़न करना भी एक बड़ी चुनौती है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने बताया है कि भूकंप से अब तक लगभग 23 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है. नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े-
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