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सरकार का फ़ैसला राजनीति से प्रेरित: नक़वी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करता हूँ. मेरा मानना है कि कांग्रेस नेतृत्ववाली सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आरक्षण का प्रावधान कर एक सम्मानित शैक्षिक संस्थान के संबंध में एक बड़ा पाप किया था. सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अलीगढ़ मुस्लिम मदरसा बनाने का षडयंत्र किया था. मेरा मानना है कि ये पाप देश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करनेवाला था. ऐसे क़दम देश के अल्पसंख्यक विशेषकर मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक प्रगति में बाधक रहे हैं. हमारी अपील है कि सरकार संप्रदाय के नाम पर और धर्म के नाम पर आरक्षण के झुनझुने के माध्यम से सामाजिक एकता और सौहार्द को नुक़सान पहुँचाने से बाज आए. सरकार ने धर्म के नाम पर आरक्षण का फ़ैसला राजनीतिक लाभ के लिए लिया था. मेरा कहना है कि इस फ़ैसले पर अपील के बजाए सरकार इसे वापस लेने पर विचार करे. ग़ौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है और वह मुसलमानों को आरक्षण नहीं दे सकती. केंद्र सरकार ने 25 फ़रवरी को एक अधिसूचना जारी करके एएमयू में मुसलमानों को 50 फ़ीसदी आरक्षण देने का फ़ैसला किया था. |
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